सुरगंगा संगीत महोत्सव की सोलहवीं निशा बनारस की गुरु परंपरा को समर्पित उभरते हुए सितारों के नाम रही। नागरी नाटक मंडली के प्रेक्षागृह में सुरगंगा संगीत महोत्सव में बुधवार को शहर के नवोदित कलाकारों ने मंच पर अपना हुनर दिखाया। इन कलाकारों को पिछले 15 दिनों से टाउनहाल मैदान में संगीत ग्राम के गुरुकुल में प्रशिक्षण दिया जा रहा था।
सैकड़ों की संख्या में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके प्रशिक्षुओं में से चुने हुए कलाकारों को मंच देकर उनकी प्रतिभा को और निखारने का प्रयास महोत्सव के माध्यम से किया गया। शिवानी पांडेय ने गणेश वंदना से समारोह का शुभारंभ किया। इसके बाद पंडित गणेश मिश्रा ने गंगा स्तुति की। उनके साथ बीस कलाकारों के समूह ने रंग जमा दिया। नवोदित कलाकारों में माला ने ‘हौले हौले मनवा डोले’ वैष्णवी ओझा ने ‘हां हंसी बन गए’ योगेश मिश्रा ने ‘मेरे सपनों की रानी’ बरखा विश्वकर्मा ने ‘लफ्जो की है ये कहानी’ आदित्य शुक्ला ने ‘लफ्ज कितने ही तो’ से समां बांधा। कौशल वर्मा ने ‘मैं रंग शर्बतों का’ शशिकांत कौशल ने ‘प्यार दिवाना होता है’ रूबी दूबे ने ‘ये शमा’ मीनू ने ‘नैनो में बदरा छाये’ गर्व वर्मा ने ‘तूही ये मुझको बता दे’ अनुश्री पांडेय ने ‘मेरी आवाज ही’ की प्रस्तुति से सुरों की महफिल सजाई। नमन शर्मा ने ‘मुस्कुराने की वजह’ सुनाकर वाहवाही बटोरी। पूजा कुमारी ने ‘तेनू इतना मै प्यार करूं’ सोमेंद्र आर्या ने ‘झीना-झीना रे’ प्रिया कुमारी ने ‘सजना दी वारी-वारी’ सोनाली उपाध्याय ने ‘लग जा गले’ अंकित जायसवाल ने ‘जनम-जनम’ विशाखा और दिव्यांश की जोड़ी ने ‘ऐ मेरे हमसफर’ मनोरमा शर्मा ने ‘जब कोई बात बिगड़ जाए’ सानिया अली ने ‘तारे है बारात’ राजन शर्मा ने ‘मेरी सोनी मेरी तमन्ना’ से सुरों की मिठास घोली।
भारती यादव, रवि कुमार, आराधना विश्वकर्मा, बबीता कुमारी, वेला हैदर, सुयोग पाठक, दिवाकर मिश्रा, रजत यादव, मुकुंद गुप्ता ने भी शानदार प्रस्तुतियां दी। दिव्यांग बच्ची रेणुका भारद्वाज और आठ वर्षीया अनन्या तिवारी ने भी अपनी प्रस्तुतियों से सभी को मोहा। इससे पूर्व संगीत ग्राम के गुरुकुल में छात्रों को प्रशिक्षण देने वाले वाराणसी के प्रख्यात कलाकारों का अभिनंदन किया गया। प्रो. ऋत्विक सान्याल, प्रो. शारदा वेलंकर, प्रो. संगीता पंडित प्रो. मधुमिता भट्टाचार्या, पं. गणेश मिश्रा, सुचरिता गुप्ता का पदवंदन किया गया। वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्या ने गुरुआंे को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम भेंट कर माल्यार्पण किया। जबकि गुरुकुल के तीन अन्य गुरु डॉ. राजेश्वर आचार्य, संजय विद्यार्थी तथा प्रो. रेवती साकलकर शहर से बाहर होने की वजह से समारोह में उपस्थित नही हो सके। समारोह में प्रशिक्षु कलाकारों को प्रशस्ति पत्र भी दिया गया। समारोह का शुभारंभ सुरगंगा गीत के साथ किया गया। संचालन घनश्याम सेठ, उत्कर्ष सहस्त्रबुद्धे, नेहा ने किया।