करीब 30 मिनट बाद ललित अग्रवाल के पास मैसेज आया और पता चला कि उनके दो बैंक खातों से 7,37,599 रुपये उड़ा दिए गए। ठगी का अहसास होने के बाद ही ललित साइबर थाने पहुंचे और मुकदमा दर्ज कराया। अब साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस लाइन स्थित क्वार्टर में रहने वाली सृष्टि शैफाली को कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने का झांसा देकर साइबर अपराधियों ने 8.73 लाख रुपये की ठगी कर ली। इस मामले में साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
सृष्टि के मुताबिक अनिका शर्मा नामक युवती ने उन्हें ऑनलाइन टीडब्ल्यूजी स्कीम बता कर कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का झांसा दिया था। अनिका खुद को कंपनी का मैनेजर बताती थी और व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर काम करती थी। वैभव और रितेश खुद को अनिका शर्मा का सहयोगी बताते थे। उन्होंने पेटीएम के माध्यम से 8.73 लाख रुपये का निवेश किया, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। अब मूलधन तक नहीं मिल रहा है। मुनाफा देने की कोई बात ही सामने नहीं आई।
साइबर अपराध से संबंधित मुकदमे जिले के सभी थानों में दर्ज होते हैं। मगर, पांच लाख या उससे अधिक रुपये के ठगी के मामले सारनाथ स्थित साइबर क्राइम थाने को सौंप दिए जाते हैं। बीते एक जनवरी से 30 जून तक साइबर अपराध थाने में ऐसे 13 मुकदमे दर्ज हुए हैं। मुकदमे दर्ज कराने वाले भुक्तभोगियों ने 86 लाख 96 हजार 382 रुपये गंवाए हैं। साइबर क्राइम थाने की पुलिस अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर 20 लाख रुपये सीज/होल्ड करा चुकी है। प्रार्थना पत्रों के आधार पर 20 लाख रुपये वापस कराए हैं।
साइबर अपराध से संबंधित विधा के विशेषज्ञ श्यामलाल गुप्ता ने बताया कि भुक्तभोगी सबसे पहले 1930 नंबर पर फोन कर शिकायत दर्ज कराएं। यदि यह नंबर व्यस्त बताए तो डायल 112 पर संपर्क करें और अनुरोध करें कि साइबर अपराध शाखा में कॉल ट्रांसफर कर दें। www.cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। www.uttarpradeshpolice.gov.in में सिटिजन चार्टर सेक्शन में जाकर ई-एफआईआर भी की जा सकती है। मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर से UPCOP एप इंस्टॉल कर ई-एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। अपने नजदीकी थाने की साइबर हेल्प डेस्क या सारनाथ स्थित साइबर क्राइम थाने में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
विशेषज्ञ ने कहा कि आभासी दुनिया में आप जितने सतर्क रहेंगे, उतने ही ज्यादा सुरक्षित रहेंगे। ऑनलाइन बंपर ऑफर, कम समय में ज्यादा मुनाफा और पैसा दोगुना करने जैसी योजना के झांसे में कभी नहीं आना चाहिए। अपने डेबिट-क्रेडिट कार्ड व उसके पिन के साथ ही बैंक अकाउंट को लेकर हमेशा अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। इनसे जुड़ी कोई भी जानकारी फोन, मैसेज और ई-मेल के माध्यम से कभी किसी से साझा नहीं करनी चाहिए। व्हाट्स एप या टेक्स्ट मैसेज के माध्यम से आए किसी लिंक को क्लिक न करें। किसी भी कंपनी के कस्टमर केयर का नंबर जानना हो तो उसकी वेबसाइट पर ही जाएं।