मंडलायुक्त कार्यालय में सिग्नेचर बिल्डिंग और स्काई वॉक बनकर तैयार होगा। सिग्नेचर बिल्डिंग डमरू के आकार का होगा। रिंग रोड के निर्माण के बाद शहर की सड़कों को भारी वाहन से मिली राहत के बाद अब शहर की सड़कों के दिन बहुरने लगे हैं। प्रयागराज से काशी के प्रवेश द्वार रोहनिया से लहरतारा तक सिक्सलेन भी अब शहर की नई पहचान बना है।
भैंसा गाड़ी से लेकर कॉम्पैक्टर, सीसीटीवी, एआई तक का सफर
बीते 25 वर्षों में काशी की स्वच्छता ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। 2000 में जहां भैंसा गाड़ी से कूड़ा उठता था। वहीं अब अब कॉम्पैक्टर से कूड़ा उठाया जा रहा है। अब निगरानी के लिए सीसीटीवी और एआई की मदद ली जा रही है। उस समय सफाईकर्मी मोहल्ले के 'चचा' हुआ करते थे।
रेलवे स्टेशनों पर 25 साल पहले तक ट्रेनों की संख्या भी बहुत कम थीं। अब समय बदलने के साथ ही ट्रेनों के बढ़ने की वजह से यात्रियों को बड़ी राहत हो रही है। कैंट स्टेशन पर 2001 से पहले करीब 30 ट्रेनों की आवाजाही हर दिन होती थी, वहीं अब ये संख्या बढ़कर 70 से ज्यादा हो गई है। इनमें आठ वंदे भारत और दो अमृत भारत ट्रेनें भी हैं। इसके अलावा बनारस स्टेशन पर भी 2001 में केवल 6 से 8 ट्रेन थी वह भी इस समय बढ़कर 50 के पार पहुंच गई है। इस समय दिल्ली, मुंबई, आगरा, पुणे, रांची आदि जगहों के लिए यात्री सफर कर रहे हैं।
25 साल पहले 100 नावें, अब संख्या 4 हजार के पार
गंगा में साल 2001 में सभी घाटों को मिलाकर किसी तरह 100 नावें चल रही थीं। अब यह संख्या बढ़कर 4000 के पार पहुंच गई है। चार क्रूज चल रहे हैं।