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25 साल में काशी: पहले एक भी फ्लाईओवर नहीं था और अब सात, रोपवे का नेटवर्क, शहर में सड़कों का बिछा जाल

Tue, 05 May 2026 11:44 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: काशी में पिछले 25 साल में बहुत बदलाव हुए हैं। 25 साल पहले यहां एक भी फ्लाईओवर नहीं था, लेकिन आज सात फ्लाईओवर बिछ चुके हैं। वहीं सड़कों का नेटवर्क 1924 किमी से 4548 किमी तब बढ़ गया है।
 
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varanasi city - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीते 25 साल में काशी ने बहुत बदलाव देखे हैं। विकास की नई इबारत लिखी है। 25 साल पहले काशी में एक भी फ्लाईओवर नहीं था और अब सात-सात फ्लाईओवर के जाल बिछ चुके हैं। सेतु निगम के रिटायर्ड अधिकारी वीके सिंह ने बताया कि ढाई दशक पहले शहर में एक भी फ्लाईओवर नहीं था। आज चौकाघाट फ्लाईओवर, फुलवरिया फ्लाईओवर, पुलिसलाइन फ्लाईओवर, मंडुवाडीह आरओबी, कज्जाकपुरा आरओबी, ककरमत्ता आरओबी, फुलवरिया आरओबी हैं। आज सड़कों का नेटवर्क 1924 किमी से 4548 किमी तब बढ़ गया है।

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पहले गंगा पर एकमात्र राजघाट का पुल था। अब गंगा पर सामनेघाट, बलुआ, विश्वसुंदरी पुल हैं। अगले कुछ वर्षों में सिग्नेचर पुल की भी सौगात मिल जाएगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में काशी को जल्द ही रोपवे की सौगात मिलने जा रही है। काशी विश्वनाथ धाम का भव्य स्वरूप भी इस साल निखरकर सामने आया है। पूर्वांचल का पहला सिग्नेचर ब्रिज बनने जा रहा है। काशी में जल और थल के बाद नभ की सवारी की तैयारी चल रही है।

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मंडलायुक्त कार्यालय में सिग्नेचर बिल्डिंग और स्काई वॉक बनकर तैयार होगा। सिग्नेचर बिल्डिंग डमरू के आकार का होगा। रिंग रोड के निर्माण के बाद शहर की सड़कों को भारी वाहन से मिली राहत के बाद अब शहर की सड़कों के दिन बहुरने लगे हैं। प्रयागराज से काशी के प्रवेश द्वार रोहनिया से लहरतारा तक सिक्सलेन भी अब शहर की नई पहचान बना है।

भैंसा गाड़ी से लेकर कॉम्पैक्टर, सीसीटीवी, एआई तक का सफर
बीते 25 वर्षों में काशी की स्वच्छता ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। 2000 में जहां भैंसा गाड़ी से कूड़ा उठता था। वहीं अब अब कॉम्पैक्टर से कूड़ा उठाया जा रहा है। अब निगरानी के लिए सीसीटीवी और एआई की मदद ली जा रही है। उस समय सफाईकर्मी मोहल्ले के 'चचा' हुआ करते थे।

ये भी जानें

  • 80700 लाख रुपये की लागत से 3.75 किमी लंबा रोपवे का नेटवर्क
  • पहले भैंसा गाड़ी से उठता था कूड़ा और अब कॉम्पैक्टर से, एआई से हो रही निगरानी
  • पहले गंगा पर सिर्फ राजघाट पुल था और अब तीन पुल हैं जल्द सिग्नेचर ब्रिज की भी मिल सकती है सौगात
  • 1350 मीटर कज्ञ्जाकपुरा आरओबी की लंबाई है
  • 50000 वाहन फुलवरिया फोरलेन से रोज गुजरते हैं
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पहले सिर्फ 30 ट्रेनें थीं, अब 70 से ज्यादा इनमें आठ वंदे भारत, दो अमृत भारत

रेलवे स्टेशनों पर 25 साल पहले तक ट्रेनों की संख्या भी बहुत कम थीं। अब समय बदलने के साथ ही ट्रेनों के बढ़ने की वजह से यात्रियों को बड़ी राहत हो रही है। कैंट स्टेशन पर 2001 से पहले करीब 30 ट्रेनों की आवाजाही हर दिन होती थी, वहीं अब ये संख्या बढ़कर 70 से ज्यादा हो गई है। इनमें आठ वंदे भारत और दो अमृत भारत ट्रेनें भी हैं। इसके अलावा बनारस स्टेशन पर भी 2001 में केवल 6 से 8 ट्रेन थी वह भी इस समय बढ़कर 50 के पार पहुंच गई है। इस समय दिल्ली, मुंबई, आगरा, पुणे, रांची आदि जगहों के लिए यात्री सफर कर रहे हैं।

25 साल पहले 100 नावें, अब संख्या 4 हजार के पार 
गंगा में साल 2001 में सभी घाटों को मिलाकर किसी तरह 100 नावें चल रही थीं। अब यह संख्या बढ़कर 4000 के पार पहुंच गई है। चार क्रूज चल रहे हैं।
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