श्रेया ने बताया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने नियमित रूप से प्रतिदिन छह से सात घंटे पढ़ाई की और कोचिंग के माध्यम से विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी लिया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के सहयोग को दिया। उनका कहना है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सही दिशा में तैयारी से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
दोनों छात्रों की सफलता के पीछे परिवार का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। उनकी माता सुनीता सिंह काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत हैं, जबकि पिता रमेश चंद्र सिंह ट्रॉमा सेंटर परिसर स्थित एक दवा की दुकान पर कार्य करते हैं। उन्होंने बच्चों को बेहतर शिक्षा और पढ़ाई का अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया।
सगे भाई-बहन की एक साथ मिली इस सफलता से गांव में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों ने कठिन परिश्रम और लगन से यह मुकाम हासिल कर अन्य विद्यार्थियों के सामने एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है।