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सप्तम कालरात्रि पर हुई मां दक्षिणेश्वरी काली की आराधना

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नवरात्र की सप्तमी पर मां काली की आराधना हुई। कोरोना संक्रमण के कारण सोमवार को शहर के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित रही। माता का षोडशोपचार और महानिशा पूजन के उपरांत कपाट बंद कर दिया गया। पुजारी परिवार ने माता के दर्शन-पूजन की परंपरा का निर्वहन किया।
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सोमवार को भोजूबीर पंचक्रोशी मार्ग स्थित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में सुबह पांच बजे मां का पंचामृत से अभिषेक हुआ। इसके उपरांत माता को नवीन वस्त्र धारण कराया गया। मां काली को रजतमुंड माला पहनाकर मंगला आरती उतारी गई। दोपहर में भोग आरती संपन्न हुई। रात्रि में 8:30 बजे मां को पंचमकार का भोग अर्पित किया गया। 108 घी की बाती और सवा किलो कपूर से माता की महाआरती की गई। महंत गोपाल गिरी ने संपूर्ण विधि विधान संपन्न कराया। मंदिर के व्यवस्थापक राजेश गिरि ने आरती उतारी।
वहीं, विश्वनाथ गली स्थित मां काली के मंदिर में भी पुजारी परिवार ने पूजन संपन्न कराया। षोडशोपचार पूजन के उपरांत कपाट बंद कर दिए गए। लक्सा स्थित प्राचीन काली मठ में माता के दर्शन के लिए सीमित संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। शहर के दूसरे मंदिरों में माता के दर्शन पूजन के लिए सीमित संख्या में भक्त पहुंचते रहे। कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार अधिकतर भक्तों ने बाहर से ही दर्शन पूजन किया।
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