शिव की नगरी काशी में उनके आराध्य भगवान राम के पूजन का उल्लास कुछ खास ही होता है। रामनवमी पर काशी उनके आराध्य की भक्ति में रंग जाती है। कहीं रामनाम का खाता खुलता है तो कहीं रामनाम की यात्रा निकलती है। कोरोना संक्रमण के कारण रामनवमी पर शिव की नगरी में होने वाले सभी आयोजनों को स्थगित कर दिया गया है। गंगा की लहरों पर निकलने वाली रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा भी स्थगित कर दी गई है।
पंचक्रोशी, अंतरगृही, द्वादश ज्योतिर्लिंग, नौ दुर्गा, नौ गौरी की परिक्रमा यात्रा वाले शहर में गंगा की लहरों पर रामनवमी के दिन रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा का आयोजन होता है। रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा के समन्वयक चंद्रशेखर कपूर ने बताया कि संचालक मंडल की बैठक में रामकथा यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। सांकेतिक आरती के जरिए परंपरा का निर्वहन किया जाएगा।
गंगा में निकलने वाली शोभायात्रा तुलसीघाट से नाव-बजड़ों के साथ निकलकर राजघाट तक जाती है। शोभायात्रा में भगवान राम के जन्म के साथ ही मानस के विविध प्रसंगों पर आधारित झांकियां आकर्षण का केंद्र होती हैं। संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ गंगा की मध्यधारा में नाव-बजड़ों पर सजी झांकियों की आरती उतारते हैं। इसके बाद रामधुन और भजनों के साथ राम की लीलाओं पर आधारित झाकियां आगे बढ़ जाती हैं। चेतसिंह, घाट, हनुमान घाट, हरिश्चंद्र घाट, केदार घाट, चौकी घाट, पांडेय घाट, दशाश्वमेध घाट होते हुए यह शोभायात्रा भैंसासुर घाट पर विराम लेती है।
राम शोभायात्रा भी स्थगित
विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में रामनवमी पर हर साल निकलने वाली श्रीराम शोभायात्रा को भी स्थगित कर दिया गया है। काशी महानगर के कार्यकर्ता व पदाधिकारियों ने कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया। रामनवमी पर यह यात्रा हर साल औरंगाबाद से कालीमहल, पानदरीबा, चेतगंज, लहुराबीर, नई सड़क, गिरजाघर होते हुए दशाश्वमेध घाट पहुंचती है। यात्रा की शुरुआत 2004 में अशोक सिंघल ने कराई थी। इस दौरान राम शोभायात्रा समिति के अध्यक्ष यतींद्र चतुर्वेदी, प्रणय पांडेय, संतोष चौरसिया, कन्हैया सिंह, सत्य प्रकाश, रजत जायसवाल, राजन तिवारी आदि मौजूद रहे।