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शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर बरसात ने डाला खलल

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शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर श्रद्धा और उल्लास नजर आया। पंडालाें में कहीं धुनुची की सुगंध बिखर रही थी तो कहीं ढाक की गूंज पर माता की आराधना हो रही थी। कोरोना संक्रमण के कारण काशी के पंडालों की भव्यता तो नजर नहीं आ रही है, लेकिन काशीवासियों का उत्साह देखते ही बन रहा है। कहीं प्रतिमा के दर्शन हो रहे हैं तो कहीं कलश स्थापित किए गए हैं। रात की बजाय दिन में श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा नजर आई। वहीं शाम को हुई बरसात ने भी थोड़ा खलल डाला।
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शुक्रवार को शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर सुबह से ही पूजा पंडालों में भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लोग माता के दर्शन कर रहे थे। सबसे खास बात यह रही है कि स्थानीय पंडालों में स्थानीय श्रद्धालु ही दर्शन पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। शाम 7:30 बजे जैतपुरा स्थित मां बागेश्वरी देवी दुर्गा पूजा समिति की ओर से स्थापित पंडाल में आसपास के लोगों की ही भीड़ नजर आई। हर साल दुर्गा पूजा में लोगों की भीड़ से गुलजार रहने वाले बागेश्वरी देवी का मैदान खाली पड़ा हुआ था। मैदागिन से मच्छोदरी के बीच सड़कें विद्युत झालरों की रंग बिरंगी लाइट से चमक तो रही थीं लेकिन बीच में जब लाइट कटी तो सड़कों पर अंधेरा छा गया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का भी आम जनता पर असर नजर आ रहा है। लोग झुंड में जाने की बजाय इक्का-दुक्का की संख्या में ही पंडालों में पहुंच रहे हैं। बंगाली समुदाय की ओर से स्थापित पंडालों की छटा तो अलग ही नजर आ रही है।
पूजा पंडालों में सोशल डिस्टेंसिंग नहीं
प्रशासन की ओर से पूजा समितियों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने का निर्देश दिया गया है। पूजा समितियों ने इस पर सहमति भी जताई थी लेकिन शहर में कुछ पूजा समिति ऐसी भी हैं जिनकी सहमति केवल प्रशासनिक कागजों पर ही नजर आ रही हैं। कई पूजा पंडालों में ना तो सैनेटाइजर रखा गया था और ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए वालंटियर का इंतजाम। वहीं बिना मास्क के लोगों को भी पूजा पंडाल में दर्शन के लिए आने-जाने दिया जा रहा था।
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