टीम मैनेजर संजीव राणा ने बताया कि वॉलीबॉल में ऊंचे कद का खिलाड़ी नेट के ऊपर से स्पाइक और ब्लॉक आसानी से कर सकता है। वह ज्यादा ऊंचाई से हिट कर पाता है और प्रतिद्वंद्वी के हमलों को आसानी से रोक भी सकते हैं। वहीं छोटे कद के खिलाड़ी अपनी फुर्ती के चलते बॉल को नीचे गिरने से रोकने में सफल होते हैं।
हाइट के चलते आक्रामक पोजीशन जैसे आउटसाइड हिटर को भी काफी मदद मिलती है। यहां लंबे कद के खिलाड़ी नेट के ज्यादा करीब से गेंद को नीचे की ओर मार सकते हैं, तो विरोधी टीम का खिलाड़ी नेट के ऊपर उस बॉल को ब्लॉक कर सीधे अंक हासिल करता है। ऊंचे कद के खिलाड़ी सर्विस और अटैक में ऊंचाई से गेंद को एंगल और ताकत के साथ हिट कर सकते हैं।
नेशनल वॉलीबॉल गेम में भाग लेने वालीं खिलाड़ी।
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पिछले विजेता हरियाणा टीम की औसत हाईट 7.5 फीट रही
पुरुष वर्ग में गत वर्ष के विजेता हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब केरल टीम के खिलाड़ियों की हाइट ज्यादा है। जबकि पिछले साल बालिका वर्ग की चैपियन पूर्वोत्तर के खिलाड़ी भी कम हाइट के बावजूद ट्रॉफी के लिए भिड़ेंगे। यूपी की टीम में शक्ति सिंह 6 फिट 3 इंच, जबकि आदित्य राणा 6 फिट 6 इंट के खिलाड़ी हैं जबकि बालिका वर्ग की कप्तान नीतू और शैली अपनी ऊंचाई की वजह से टीम के लिए स्कोर करने में कारगर होंगी।
हिमाचल प्रदेश में अंडर-17 आयुवर्ग में मुस्कान सेंटर ब्लॉकर पोजीशन से खेलती हैं। उनकी हाईट 6.1 फीट है। हिमाचल प्रदेश की पुरुष और महिला टीम में 14-14 और टीम मैनेजर और कोच शामिल हैं।
लंबे खिलाड़ियों को सफर और स्टे में आती हैं दिक्कतें
खेल एक्सपर्ट बताते हैं कि खिलाड़ियों की हाइट अक्सर विजेता तो बनाती ही है लेकिन कभी कभी आम जीवन में मुश्किलें भी बढ़ाती हैं। बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और तैराकी जैसे खेलों में हाइट बेहतर स्कोर दिलाता है लेकिन बस व ट्रेन के कंपार्टमेंट की सीटों और होटल आदि के बेड उनके हाइट के मुकाबले कुछ छोटे ही पड़ जाते हैं। इससे सफर और यात्राओं में बड़ी दुविधा हो जाती है। इसको लेकर भी बेहतर उपाय होने चाहिए।