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हिंदी पर मंथन: जेन जी की भाषा बदली है, इसमें हमारी कमी, हम उन्हें वह संस्कार नहीं दे पा रहे

Sun, 13 Sep 2026 10:16 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

कैसे बदल रही युवाओं और जेन जी की हिंदी विषय पर अमर उजाला कार्यालय में शनिवार को संवाद हुआ। इसमें शहर के बड़े लेखक, प्रोफेसर, शिक्षक और कुछ विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और अपने विचार व्यक्त किए।
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चांदपुर स्थित अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम में मौजूद अतिथि। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय हिंदी दिवस में अब एक दिन शेष है। इसी उपलक्ष्य में शनिवार को अमर उजाला ने चांदपुर स्थित कार्यालय में ‘कैसे बदल रही युवाओं और जेन जी की हिंदी’ विषय पर संवाद का आयोजन किया। इसमें शहर के बड़े लेखक, प्रोफेसर, शिक्षक और कुछ विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।

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संवाद में जेन जी की हिंदी और उनकी भाषा को लेकर काफी सार्थक चर्चा हुई। भाषा में सुधार को लेकर छात्रों व शिक्षाविदों ने कहा कि जेन जी की भाषा अलग है। उनकी भाषा में विस्तार नहीं, बल्कि शॉर्टकट है। इसके फायदे और नुकसान पर लोगों ने बारी-बारी से अपने विचार रखे। शिक्षाविदों ने कहा कि जेन जी की भाषा शैली से कोई समस्या नहीं है। इनकी भाषा से हिंदी सशक्त हो रही है। इसमें बदलाव तो जरूरी है ही, उससे भी ज्यादा जरूरी भाषा के मूल को समझना है।

आज के समय में अन्य बदलावों की तरह ही भाषा में भी बदलाव हुआ है। हमें इस बदलाव को जेन जी पर नहीं मढ़ना चाहिए। समाज में व्याप्त जातिवाचक संज्ञाओं ने भाषा की हत्या की है। इसी तरह की एक संज्ञा जेन जी भी है। इन्हें शॉर्टकट पसंद है। हालांकि, शॉर्टकट में भी वे अपनी बात पूरी कर लेते हैं। अगर आज के समय में आप किसी भी भाषा में खुद की बात दूसरों को समझा ले रहे हैं तो यह बड़ी बात है। जेन जी को भी भाषा का अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि आने वाला समय उन्हीं का है। -डॉ. प्रकाश उदय, साहित्यकार



हिंदी भाषा बहुत व्यापक है। इसमें एक लाख से अधिक शब्द हैं। आज जो शब्द हम लोग पढ़ते हैं, उन्हें भी पहले अलग-अलग विधा के विद्वानों ने तैयार किया है। हमारा काम किसी शब्द का अर्थ बताना नहीं है, यह काम हमेशा से एक विशेष वर्ग का रहा है। जेन जी की भाषा बिल्कुल बदली है। इसमें हिंदी का प्रयोग कम भी हुआ है। लेकिन इसमें हमारी कमी है। हम जेन जी को वह संस्कार नहीं दे पा रहे हैं। आजकल के युवाओं को पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। इससे शब्दकोष बढ़ेंगे और भाषा में सुधार भी होगा। भाषा पारदर्शी होनी चाहिए, जिसे आसानी से बोला और समझा जा सके। -व्योमेश शुक्ला, प्रधानमंत्री, नागरी प्रचारिणी सभा



भाषा में नवीनता और स्थिरता होगी, तभी उसकी सुंदरता है। भाषा भी समय के साथ परिवर्तित होती है। आज जेन जी शॉर्टकट में बात कर रहे हैं, इसलिए क्योंकि इसमें सहजता है। इस भाषा में कोई बुराई नहीं है। इसमें दोष हमारा है कि हमने इस पीढ़ी को कोई नए शब्द नहीं दिए। हम खुद में बदलाव करें, तभी जेन जी को कुछ सिखा पाएंगे। आज जेन जी की भाषा अगर बदली है तो कहीं न कहीं हमारी कमियों के कारण। हमने खुद उन्हें कोई माहौल नहीं दिया। हमने खुद को अन्य भाषाओं से अलग कर दिया। जेन जी की भाषा उनके अनुसार अच्छी है। -प्रो. एसके पांडेय, आईआईटी बीएचयू

भाषा में एक बेबाकी होनी चाहिए। कोविड काल ने हमारे शब्दकोष में बहुत से नए शब्द बढ़ाए। शिक्षा का स्वरूप बदला। इससे भाषा में बदलाव देखने को मिल रहा है। आज अगर जेन जी की भाषा बदली है तो वो इसी का परिणाम है। हिंदी भाषा जेन जी कम इस्तेमाल करती है, जो कि गलत है। हिंदी हमारी मातृभाषा है और हमारा गौरव है। इसे बढ़ावा देने की जरूरत है। - प्रो. सुमन जैन, बीएचयू



हिंदी बदल रही है। हमारी कोशिश रहती है कि हिंदी भाषा का प्रयोग ही बोलचाल में होता रहे। इस समय की पीढ़ी में उपयोग हो रही हिंदी भाषा में सुधार की जरूरत है। भाषा में शुद्धता होनी चाहिए। जिस प्रकार से जेन जी की भाषा में बदलाव हो रहा है, उसके बीच संभलने की जरूरत है। भाषा को संजोने की आवश्यकता है। - शशांक मिश्रा, आरजे, रेड एफएम



इस समय हम भाषा के संक्रमण काल में हैं। भाषा के बदलाव की चिंता है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि साहित्य में इसका बदलाव न हो। जेन जी की भाषा के परिवेश में हिंदी का बचाव बहुत जरूरी है। हमें प्रयास करना चाहिए कि हिंदी भाषा का जो मूल है, उसमें कोई छेड़छाड़ या बदलाव न हो। - जितेंद्र पांडेय, शिक्षक, संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल, कोईराजपुर

समाज का रूप है भाषा। हमारे देश में हिंदी भाषा की जननी है। आज अगर जेन जी की हिंदी भाषा खराब हुई है तो इसमें हम जिम्मेदार हैं। भाषा को खराब मिलेनियर्स ने किया। ब्लैकबेरी मैसेंजर से ही भाषा बिगड़ी। आज के बदलते दौर में जेन जी का रुझान हिंदी की ओर है ही नहीं। हम लोग दुर्भाग्य और विडंबना में जी रहे हैं। - अवि नमन, शिक्षक, सनबीम सनसिटी

दुनियाभर में 7000 से अधिक भाषाएं हैं। इसमें हम तीसरे स्थान पर हैं। राजनीति के चक्कर में हमारी भाषा खराब हुई। जेन जी की भाषा शॉर्ट होती जा रही है। वे कम शब्दों में अपनी बात समझा रहे हैं। जेन जी की भाषा से हिंदी सशक्त हो रही है। हिंदी की जगह हिंग्लिश लेती जा रही है। मात्राएं लगाना कोई नहीं चाह रहा। भाषा को सहेजने की जरूरत है। - आरपी सिंह, शिक्षक, संत अतुलानंद रेजिडेंशियल एकेडमी

हिंदी भाषा में मां जैसा प्यार है। हम अपनी भाषा में ही भाव को व्यक्त कर सकते हैं। भाषा को समझने की जरूरत है, न कि थोपने की। जेन जी की भाषा बहुत बिगड़ गई है। इसमें सुधार की जरूरत है। हिंदी भाषा में सभी धर्म आदि समाहित हैं। हिंदी की जो गुणवत्ता है, उसे संजोकर रखने की जरूरत है। -डॉ. सुजाता पांडेय, शिक्षिका, सनबीम सनसिटी

भाषा को लेकर लोग मानसिकता बना लेते हैं। हिंदी भाषा मजबूत है। हमारी जिम्मेदारी है कि जेन जी को हिंदी का महत्व बताएं। हमें अपनी पीढ़ियों को भाषा से जोड़ने और जागरूक करने की जरूरत है। जेन जी गलत दिशा में जा रहे हैं, इसके लिए हम जिम्मेदार हैं। हमें ही जेन जी को भाषा की महत्ता बतानी पड़ेगी। -डॉ. नेमा यादव, शिक्षिका, सनबीम भगवानपुर

भाषा को लेकर लोग दूसरों को जज करते हैं, जो कि गलत है। भाषा से किसी व्यक्ति की योग्यता तय नहीं की जा सकती है। हम लोगों के यहां इंग्लिश बोलने वालों को ज्यादा महत्व दिया जाता है। जेन जी की भाषा भावनात्मक है। ये ईमोजी में बात करते हैं। इन्हें भाषा का ज्ञान होना जरूरी है। -आकांक्षा यादव, रिसर्च स्कॉलर, बीएचयू

जेन जी की भाषा रफ्तार की भाषा है। वे शॉर्टकट में बात करना ज्यादा पसंद करते हैं। यह गड़बड़ है। जेन जी को भाषा का महत्व समझना चाहिए। अगर अभी से इन्हें नहीं संभाला गया तो आने वाले समय में काफी दिक्कत होगी। हिंदी हमारी मातृभाषा है। इसे शुद्धता से लिखना, पढ़ना व बोलना आना ही चाहिए। -प्रियंका शर्मा, रिसर्च स्कॉलर, बीएचयू

जेन जी नवाचार और आधुनिकता का जन्म है। वैश्वीकरण के दौर में इंग्लिश और हिंग्लिश ट्रेंड में हैं। हिंदी के परिवर्तन को पतन बताया जा रहा है, जो कि गलत है। भाषा समानता के लिए होनी चाहिए। जेन जी की भाषा हिंग्लिश है। इस भाषा में भले ही शुद्धता न हो, लेकिन शक्ति है। -कृष्णा गुप्ता, छात्र, पीएम श्री राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज

हमें जेन जी बनना ही क्यों है। हमारे संविधान में शुरू में लिखा गया ‘इंडिया दैट इज भारत’, जबकि ‘भारत दैट इज इंडिया’ लिखा होना चाहिए था। हमारी बोली-भाषा में इंग्लिश का प्रयोग हो रहा है। हमारी ऐसी हो, जिसमें हमारी संस्कृति की झलक दिखे। हमने ही भाषा में मिलावट की है, जिससे मूलता का खंडन हो रहा है। -अंश कुमार सिंह, संत अतुलानंद रेजिडेंशियल एकेडमी

हमें संवाद के विषय का मूल देखना होगा। जेन जी भाषाओं में मिश्रण है। हिंदी में भी मिश्रण है। हम आज के दौर में एक ही भाषा को लेकर नहीं चल सकते हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम अपनी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा को भूल जाएं। भाषा ही है, जो संस्कृति और इतिहास को साथ लेकर चलती है। -नितिन दुबे, संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल, कोईराजपुर

मानव इतिहास भाषा का इतिहास है। भाषा ही हमें अलग बनाती है। किसी की पहचान को भाषा ही प्रमुख बनाती है। भाषा सिर्फ संग्रहालय में न रहे। इसके माध्यम से संचार और जोड़ने का उद्देश्य पूरा हो। जेन जी की जिम्मेदारी है कि इसे संजोए। हमें विकास करना है, लेकिन भाषा को साथ लेकर। -सनत सिंह, छात्र, संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल, कोईराजपुर

हिंदी कम बोले जाने का कारण आज का माहौल है। हमारे आसपास का माहौल ऐसा बना हुआ है कि हम हिंदी कम और इंग्लिश और हिंग्लिश का उपयोग अधिक कर रहे हैं, जो कि गलत है। हिंदी हमारी भाषा है और इसका संरक्षण हमें ही करना है। -ऋशांत जायसवाल, सनबीम लहरतारा

सिर्फ जेन जी के लिए भाषा की बात होती है। जबकि हमारे देश में ही अधिकतर लोगों को हिंदी बोलना या पढ़ना नहीं आता है। उत्तर भारत में भी जेन जी ने हिंदी के प्रयोग को कम कर दिया है। हिंदी भले ही कठिन लगती हो, लेकिन इसे बढ़ावा देने की जरूरत है। -आविष्खा श्री, सनबीम वरुणा
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हिंदी का प्रयोग कम हुआ है। नौकरी में इंग्लिश को ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसलिए भी हिंदी के उपयोग में कमी आ रही है। खासतौर पर जेन जी तो बहुत कम उपयोग कर रहे हैं। हिंदी भाषा को बढ़ावा देना जरूरी है। -वृंदा पांडेय, सनबीम भगवानपुर

जेन जी में हिंदी का प्रयोग कम हो गया है। केवल इंग्लिश को महत्व दिया जा रहा है। हम लोगों को खुद को यूपी का बताने और हिंदी में बातचीत करने में शर्म आती है, जो कि गलत है। हिंदी मातृभाषा है, हमें इस भाषा को बढ़ावा देने की जरूरत है। -संस्कृति चतुर्वेदी, छात्रा, सनबीम सनसिटी
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