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वाराणसी में रोपवे: एलाइंमेंट के साथ ही डीपीआर में होगा बदलाव, परियोजना का नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक करेगा पथ प्रदर्शन

Thu, 21 Apr 2022 10:22 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी कैंट से गिरिजा घर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना में पांच महीने में कई बार निविदा की तिथि बढ़ाए जाने के बाद भी विकासकर्ताओं ने रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में अब रोपवे परियोजना के एलाइनमेंट और तकनीकी फिजिबिलिटी का फिर से सर्वे कराया जा रहा है। 
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रोपवे - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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पिछले पांच महीने से महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजना के धरातल पर नहीं उतर पाने के बाद अब इसके डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में व्यापक बदलाव की तैयारी की जा रही है। बनारस की रोपवे परियोजना का भारत सरकार के स्वामित्व वाली नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट कंपनी लि पथ प्रदर्शन करेगी।

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कैंट से गिरिजाघर के बीच प्रस्तावित रूट के डीपीआर और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) से होने वाले निर्माण के तरीकों में बदलाव पर मंथन किया जा रहा है। इस परियोजना को वित्तीय रूप से उपयोगी बनाने के लिए व्यवसायिक गतिविधियों में परिवर्तन पर विचार किया जा रहा है। बड़े बदलाव के बाद अब विकास प्राधिकरण इसका नए सिरे से टेंडर करेगा।

पांच महीने में कई बार बढ़ी निविदा की तिथि

कैंट से गिरिजा घर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना में पांच महीने में कई बार निविदा की तिथि बढ़ाए जाने के बाद भी विकासकर्ताओं ने रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में अब रोपवे परियोजना के एलाइनमेंट और तकनीकी फिजिबिलिटी का फिर से सर्वे कराया जा रहा है।

इसमें परियोजना को वित्तीय रुप से उपयोगी बनाने के लिए कंसलटेंट वापकास के अलावा दूसरी सलाहकार कंपनियों के साथ भी मंथन किया जा रहा है। भारत सरकार की ओर से नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट कंपनी को रोपवे परियोजना के क्रियान्वयन के लिए अधिकृत संस्था नामित किए जाने के बाद रेलवे स्टेशन इसे जोड़ने के प्रयास पर भी विचार किया जा रहा है। दरअसल, वर्तमान में तैयार रोपवे परियोजना में निवेश के सापेक्ष आय बहुत कम होने के कारण पीपीपी मॉडल की इस परियोजना में कंपनियों ने रुचि ही नहीं ली।

पीलर के एलाइनमेंट में भी बदलाव
कैंट से गिरिजाघर के बीच तय रूट पर रोपवे के पीलर के लिए करीब 20 से 25 फीट गहरा गड्ढा किया जाएगा। ऐसे में जमीन की खुदाई में जनसुविधाओं से जुड़ी कई पाइप और डक के क्षतिग्रस्त होने का खतरा है। अब पीलर की फिजिबिलिटी से लेकर इसे जनउपयोगी बनाने के लिए भी सर्वे कराया जाएगा।

पिछले दिनों रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके त्रिपाठी के साथ वाराणसी विकास प्राधिकरण की रोपवे परियोजना पर हुई बैठक में इसे कैंट रेलवे स्टेशन से एकीकृत करने पर चर्चा हुई थी। अब रेलवे स्टेशन ही रोपवे के प्रवेश द्वार और टिकट की व्यवस्था के लिए रेलवे इस परियोजना का सहयोगी बनेगी।
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शहर के लिए ऐसी बनी है रोपवे परियोजना

बनारस शहर में करीब 45 मीटर से ऊंचाई से गुजरने वाले रोपवे को साजन तिराहा, सिगरा, रथयात्रा, लक्सा होते हुए गिरिजाघर पर पर पहुंचाया जाएगा। पांच किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर खर्च होने वाले 440 करोड़ रुपये का पूरा खाका भारत सरकार की सहयोगी कंपनी वैपकॉस ने तैयार किया है।

यहां बता दें कि रोपवे परियोजना पर आने वाले खर्च पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहमति बनी है और इसे पीपीपी मॉडल पूरा किया जाना था। मगर, विकासकर्ता कंपनियों के सामने नहीं आने के बाद इस परियोजना के वित्तीय सहयोग के लिए विकल्पों पर चर्चा की जा रही है।

मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि  एलाइनमेंट और फिजिबिलिटी बदलाव के लिए सर्वे कराया जा रहा है। भारत सरकार की ओर से नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट कंपनी लि को इस प्रोजेक्ट के पायलट के लिए एजेंसी नामित किया गया है। जल्द ही नए बदलाव के साथ टेंडर जारी किया जाएगा।
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