फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नाना पाटेकर: 38 साल में चार बार काशी से जुड़ा नाना का दिल, दी गई श्रद्धांजलि; वायरल संवादों के बीच आंखें नम

Thu, 08 Oct 2026 07:12 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

जानेमाने और दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से काशी में भी शोक की लहर दौड़ गई। 38 वर्षों में चार बार काशी से जुड़े नाना पाटेकर को बनारसवासियों ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। उनकी फिल्मों और वायरल संवादों को याद कर प्रशंसकों ने अपने चहेते कलाकार को भावभीनी विदाई दी। सोशल मीडिया पर भी श्रद्धांजलि संदेशों का दौर चला।
विज्ञापन
काशी में नाना पाटेकर को दी गई श्रद्धांजलि। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मैंने अपनी 12 मन लकड़ियां रखी हुई हैं, उसी में मुझे जलाना। गीली लकड़ी का इस्तेमाल मत करना, नहीं तो धुआं उठेगा। लोगों की आंखों में पानी आएगा तो इससे गलतफहमी हो जाएगी कि वो मेरे लिए रो रहे हैं। कम से कम मरते वक्त गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। नाना पाटेकर के निधन पर उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

विज्ञापन




काशी के लोग नाना पाटेकर और उनकी अदाकारी से दिल से जुड़े थे। 38 साल में वह चार बार बनारस आए। वर्ष 2023 में जब वह 23 वर्षों बाद फिल्म वनवास की शूटिंग के लिए बनारस आए तो उन्होंने काशी में 30 दिन आम पब्लिक के बीच सड़कों और गलियों में शूटिंग की। दशाश्वमेध के कपड़ा व्यापारी गोपाल यादव बताते हैं कि बनारस के लोगों को कभी लगा ही नहीं कि कोई एक्टर बीच सड़क पर शूटिंग कर रहा है, उन्हें लगा कोई आस-पड़ोस का व्यक्ति ही है। 
विज्ञापन


हालांकि इसी बीच शूटिंग के दौरान उन्होंने दशाश्वमेध चितरंजन पार्क के पास एक लड़के को थप्पड़ मार दिया। 24 घंटे के भीतर सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया। इसके बाद एक्टर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। फिल्म की शूटिंग अस्सी घाट समेत अन्य घाटों पर भी हुई थी।

वर्ष 2000 में फिल्म आंच की शूटिंग के लिए नाना पाटेकर चौबेपुर क्षेत्र के छितौनी गांव पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात गांव के संतोष मूरत सिंह से हुई। नाना की संतोष से दोस्ती के बाद वह उन्हें अपने साथ मुंबई ले गए। संतोष ने नाना के घर पर 12 वर्षों तक खाना बनाने का काम किया। इस दौरान एक्टर बाटी-चोखा से लेकर बनारसी कचौड़ी-जलेबी के भी शौकीन हो गए। संतोष मूरत सिंह बताते हैं कि एक्टर को साग और हरी सब्जियां काफी पसंद थीं। इससे पहले वह करीब 38 साल पहले वर्ष 1988 में किसी शूटिंग के सिलसिले में पहली बार बनारस आए थे, हालांकि तब उन्हें शहर को ज्यादा घूमने का मौका नहीं मिला था।

Trending Videos

सोशल मीडिया पर हर दूसरे पोस्ट में नाना पाटेकर
बृहस्पतिवार की सुबह काशी में हर दूसरे व्यक्ति के मोबाइल में नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि का स्टेटस लगा हुआ था। किसी ने उनका वीडियो शेयर करते हुए लिखा, आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने..., किसी ने अनिल कपूर और नाना की जोड़ी को बिखरते देख लिखा, कंट्रोल मजनू कंट्रोल...। इसके अलावा फेसबुक, एक्स समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक्टर को श्रद्धांजलि दी गई।
विज्ञापन

डर्बी शायर क्लब ने नाना पाटेकर को दी श्रद्धांजलि। - फोटो : अमर उजाला
पितरकुंडा पर नाना पाटेकर को दी श्रद्धांजलि
डर्बी शायर क्लब ने बृहस्पतिवार को फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर श्रद्धांजलि दी। पितरकुंडा के प्राचीन कुंड पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। क्लब अध्यक्ष शकील अहमद जादूगर ने बताया कि नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत और आम जनता पर गहरा असर पड़ा। शकील ने कहा कि नाना पाटेकर ने 80 फिल्मों में बेहतरीन अभिनय किया। उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिये देश की जनता को सरकारी व्यवस्था और अपराध के खिलाफ आवाज उठाना सिखाया। इस दौरान विक्की यादव, हैदर मुलाई, मोहम्मद सलीम और प्रांजल यादव मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें