बीएचयू के जल वैज्ञानिक डॉ. कृपाराम बताते हैं कि अनियंत्रित बोरिंग, भूजल का अत्यधिक दोहन, सीवर और गंदे नालों का रिसाव टीडीएस बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। पीने के पानी में 300 तक टीडीएस अच्छा, 300 से 500 तक संतोषजनक, 500 से ऊपर खराब और टीडीएस 850 तक पहुंच जाना गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
स्वामी विवेकानंद अस्पताल, भेलूपुर के डॉ. क्षितिज तिवारी बताते हैं कि अधिक टीडीएस के पानी से दिमागी और नस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के प्रो. गोपाल नाथ के अनुसार, टीडीएस अधिक होने पर पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा बढ़ जाती है। इससे पेट संबंधी बीमारियों के साथ जोड़ो में समस्या भी बनी रहती है।
शहर के विभिन्न इलाकों में टीडीएस की स्थिति
इलाका टीडीएस स्तर (पीपीएम)
मंडुवाडीह 450
महमूरगंज 400
लंका 550
भेलूपुर 370
अस्सी 430
सिगरा 450
पांडेयपुर 350
गोदौलिया 470
मैदागिन 370
भदैनी 400
कैंट 330
लहुराबीर 450
चौक 350
नगवा 850
सामने घाट 850