नगवां में बहता नाला जो कभी असि नदी थी।
असि नदी को गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अभियंताओं और ठेकेदारों ने नाला बना डाला। पौराणिक नदी के संगम को पाटने और धारा को मोड़कर नाले में मिलाने की कहानी दिलचस्प है। वाराणसी की पहचान मिटाने के लिए ठेकेदारों ने पैसा, श्रम और वक्त तीनों बर्बाद किया। करीब तीन सौ मीटर गंगा का किनारा खोद कर नया नाला बनाया गया फिर असि नदी का इतिहास बदल दिया गया। अब नई पीढ़ी के लोग नदी की पहचान नाले की रूप में करने लगे हैं।
दरअसल नगवा में कभी कोई नाला नहीं बहता था। करीब 22 वर्ष पहले असि नदी की धारा मोड़ कर महीनों खुदाई कराई गई। अस्सी-लंका के बीच नगवा मुहल्ले से ही असि नदी गंगा की ओर उत्तरवाहिनी हुई है। नगवा में रामेश्वर मठ के पास गंगा निर्मलीकरण योजना के तहत असि नदी के चैनल को ठेकेदारों, इंजीनियरों ने बंद कर दिया। नदी की धारा मोड़कर उसे नाला बनाने की साजिश की गई। इसके लिए नगवा के क्रिकेट मैदान से होकर तीन सौ मीटर खुदाई कराई गई। प्रोजेक्टीस के अध्यक्ष इंजीनियर जगन्नाथ ओझा बताते हैं कि जहां से नगवा नाल बह रहा है, वहां बच्चे क्रिकेट खेलते थे। अब वाराणसी के नक्शे में भी असि नदी की जगह नाला दर्ज कर दिया गया है। राकेश पांडेय, ब्रह्मचारी गुरुशरण सानंद का कहना है कि असि नदी को समाप्त करने के लिए की गई साजिश की जांच कराकर नदी को पुनर्जीवित करने के कारगर कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि काशी की पहचान बची रहे।