स्वास्थ्य विभाग मरीजों को बेहतर सुविधाएं दिए जाने का दावे तो खूब करता हो लेकिन हकीकत कुछ और ही है। कोटवां गांव के मुस्लिमपुरा, खुरका और डीहवापुरा में पूरी बस्ती एक सप्ताह से चेचक की चपेट में है। सैकड़ों लोग चेचक के शिकार हैं और बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है।
इस बीच मंगलवार को मुस्लिमपुरा में ढाई साल के बच्चे की मौत से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। सूचना पाकर चिकित्सकों संग मौके पर पहुंचे काशी विद्यापीठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. ओपी शुक्ला ने दो कैंप लगवा कर सभी की जांच कराई। दोनों कैंप में 136 लोगों की जांच कर दवाइयां बांटी गईं। कोटवां के जिस मुस्लिमपुरा में चेचक से शकील के ढाई वर्षीय पुत्र इम्तजा आफरीन की मौत हुई है, इसमें करीब दो माह पहले भी चेचक फैली थी। तब विभागीय अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। शुरुआती दो तीन दिनों तक कैंप लगवार लोगों की जांच कर दवाइयां दी गईं। बाद में किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
अब हालत यह है कि पिछले एक सप्ताह से बच्चे और बड़े सभी को तेज बुखार के साथ ही पूरे शरीर पर जगह-जगह दाने निकल रहे हैं। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि बच्चे की मौत चेचक के साथ ही और कई अन्य बीमारियों की वजह से हुई है। तीनों बस्ती में दो अलग-अलग टीमें भेजकर जांच करवाई गई। इसमें कई लोग चेचक से आंशिक रूप से प्रभावित मिले। इन्हें जरूरी दवाइयां दी गईं। पीएचसी प्रभारी को चिकित्सकों की टीम भेजकर जांच कराते रहने का निर्देश दिया गया है।