कुरान की तिलावत तो करता है, नवरात्र में श्रीराम चरित मानस का पाठ भी करता है जौनपुर जिले के कछवन पूरब का पूरा गांव निवासी फरीद शेख। यही नहीं फरीद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व भी परंपरागत ढंग से गांव में मनाता है।
देश की गंगा-जमुनी तहजीब को शिद्दत के साथ मानने वाले इस युवा की गांव में ही नहीं अपितु क्षेत्र में एक अलग पहचान बन चुकी है। गांव में चाहे किसी धर्म और मजहब के लोग हों, उसे सम्मान देते हैं।
युवाओं में तो वह काफी लोकप्रिय है। फरीद का कहना है कि आस्था किसी धर्म या मजहब की गुलाम नहीं होती है।
चंदवक थाना क्षेत्र के कछवन पूरब का पूरा गांव में मुस्लिम समुदाय के फरीद शेख अपनी लोक परंपराओं और धर्म से तो जुड़े ही हैं हिंदू धर्म की पूजा पद्धतियों का भी यथोचित सम्मान करते हैं। यही वजह है कि गांव व क्षेत्र के लोगों में एक अलग ही पहचान बनाई है।
वह कई सालों से श्री रामचरित मानस का पाठ अपने गांव में करा रहे हैं। ग्रामीणों की माने तो गांव के दुर्गा मंदिर पर फरीद पिछले 2010 से लगातार चैत्र नवमी के मौके अपने गांव के ही कुछ हिंदू लड़कों को लेकर अष्टमी के दिन श्री राम चरित मानस का पाठ करते हैं। जिसका समापन नवमी के दिन होता है।
इसके बाद पूरे गांव में खुद प्रसाद बांटते हैं और सबको एकत्र कर शाम को कीर्तन भजन कराते हैं। इसके अलावा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
आस्था किसी मजहब की गुलाम नहीं होती
फरीद ने कहा, आस्था किसी मजहब की गुलाम नहीं
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फरीद के पिता मु. इदरीस बताते हैं की वह बचपन से ही हिन्दू भक्ति आस्था के प्रति समर्पित रहा है। वह बंगलुरू के एक ट्रांसपोर्ट में काम करता है। लेकिन आज भी उक्त मौके पर गांव आकर पिछले सात सालों से सभी लोगों को एकत्र कर मानस पाठ करता है और खुद मानस प्रेमी होने का एहसास भी करता है। उनके पिता ने बताया कि वह काफी आस्थावान है।
फरीद शेख का कहना है कि गांव में हिंदू रीति रिवाज से होने वाले पूजा पाठ में हम भाग लेते हैं। इससे आपसी भाईचारे को बढ़ावा मिलता है। हमारे त्योहार में भी गांव के हिंदू परिवार के लोग शिरकत करते हैं।
उनका हर तरह का सहयोग मिलता है। कहा कि आस्था किसी मजहब की गुलाम नहीं होती। उसके इस कार्य में अरविन्द सिंह, सोबराती, सब्बीर अली, राहुल सिंह, अंकित, चहेतु, राजू सिंह, मोछू आदि भी सहयोग करते हैं।