‘मोदी की नोटबंदी’ की पतंग बनातीं मुस्लिम महिलाएं
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पतंग बनाने का पुश्तैनी कारोबार करने वाली आएशा परेशान हैं। ‘पीएम मोदी की नोटबंदी’ वाली पतंगों की बाजार में जबरदस्त मांग है और प्लास्टिक व कागज मिल नहीं रहे। ऐसे में पतंग बने तो कैसे।
नोटबंदी के बाद कारोबार पहले ही मंदा पड़ा था, इस पर अहमदाबाद से आने वाला माल बाजार में बमुश्किल मिल रहा है। ऐसे में आएशा की परेशानी जायज है।
पीलीकोठी, अंबिया मंडी, सुग्गा गड़ही, कोयला बाजार, सरैया जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में पतंग बनाने का काम होता है। अधिकतर मुस्लिम परिवार इस काम से जुड़े हैं। इस बार पतंगों पर भी नोटबंदी और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दे छाए हैं।
पतंग बनाने के लिए प्रिंटेड प्लास्टिक अहमदाबाद से आता है। नोटबंदी के बाद प्लास्टिक और कागज के कारोबार पर असर पड़ा है। इसके चलते मांग के मुताबिक नोटबंदी वाली पतंगें बनाने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
महंगी होने के बावजूद मोदी के सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी वाली पतंगें खूब बिक रही हैं। पतंग विक्रेता इरशाद बताते हैं कि इन पतंगों की अच्छी डिमांड है।
पतंग बनाने के अपने पुश्तैनी काम से जुड़ीं आएशा बताती हैं कि एक हजार सामान्य पतंग बनाने के लिए 900 रुपये का माल मिलता है, वहीं मोदी वाली पतंग के लिए माल 1300 रुपये में मिल रहा है। महंगाई के बावजूद हमें माल नहीं मिल रहा है कि हम मोदी वाली पतंग बना सकें।