दूसरी प्रस्तुति फर्रुखाबाद घराने के ख्यातिलब्ध कलाकार पं. अनिंदो चैटर्जी व सुपुत्र अनुब्रत चैटर्जी के तबला ओर उस्ताद मुराद अली खां के सारंगी वादन की रही। दोनो ने विविध तालों की विविध लयकारियों को अनोखे अंदाज में प्रस्तुत करते हुए श्रोताओ का ह्रदय विभोर किया।
कलाकारों ने उठान, कायदा रेला की कुशल प्रयुक्ति से आनंदित किया । तीसरी प्रस्तुति बनारस घराने के ख्यात कलाकार पद्मभूषण पं. साजन मिश्र व उनके शिष्य व सुपुत्र स्वरांश मिश्र की रही। एकताल में निबद्ध बंदिश कौन गत भईली...सुनाकर रससिक्त किया। रूपक में तराना के बाद समापन जमुना जल सुनाकर किया। तबला संगति शुभ महाराज एवं तानपुरा संगति सागर मिश्र व मोहित तिवारी की और सारंगी पर संगत विनायक सहाय की रही।
अंतिम प्रस्तुति में रोनू मजूमदार के बांसुरी वादन तथा पं. तरुण भट्टाचार्य के संतूर वादन की जुगलबंदी ने मनमोह लिया। तबले पर उस्ताद फजल कुरैशी एवं उस्ताद अकरम खान ने संगत की। व्यवस्था में सहयोग अतुल सिंह एवं संजय ने किया। संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य ने किया। इस दौरान डॉ. सुभाषचंद्र यादव व लवकुश द्विवेदी, राजू दास मौजूद रहे।
काशी में राग रंग का शुभारंभ
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कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि श्री काशी विश्वनाथ धाम यात्रा के तहत आयोजित कार्यक्रमों की माला में राग रंग समारोह पुष्प के समान है। देश की सांस्कृतिक विरासत और परंपरा को संजोए रखना सभी का कर्तव्य है। पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि कला का धर्म शाश्वत है वही शाश्वत स्वरूप बाबा की नगरी की जीवंतता का आयाम है।