कर्नाटक शैली में कलाकारों ने शिव-पार्वती विवाह के भावों को प्रस्तुत किया
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देवाधिदेव महादेव बाबा विश्वनाथ के स्वर्ण शिखरों वाले मुक्तांगन में रविवार को संगीतांजलि का नया अध्याय शुरू हो गया। सुर-लय और ताल से बाबा की स्तुति और देश भर के कलाकारों को मंच देने की विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की योजना को पंख लग गए।
फूलों से मंडप में नटराज को रिझाने के लिए पहली प्रस्तुति दक्षिण भारतीय भाव नृत्य से हुई। कर्नाटक शैली में कलाकारों ने शिव-पार्वती विवाह के भावों को सुर, लय और ताल में इस कदर पिरोया कि श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पं. अशोक द्विवेदी, कार्यपालक समिति के सभापति/मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र की मौजूदगी में संगीतांजलि का श्रीगणेश तारकेश्वर महादेव मंदिर के सामने फूलों से सजे भव्य मंच पर दोपहर बाद 3:30 बजे हुआ।
कर्नाटक के बंगलूरू से आए काशी विश्वनाथ नृत्य मंडली के कलाकारों ने भरत नाट्यम नृत्य के जरिए शिव-पार्वती विवाह के भावों को लयबद्ध किया। केवी रमन घनपाठी के निर्देशन में सुरों से बाबा का आंगन गूंजा।
पारंपरिक वेश में सजे कलाकारों ने कर्नाटक शैली के संगीत पर आधारित बंदिश को भावों में साकार किया।
मंच पर एक तरफ फूलों से बनी भगवान शिव और दूसरी ओर पार्वती की प्रतिमा को सिंहासनारूढ़ कर नृत्य प्रस्तुति दी। शाम सात बजे तक चले शिव-पार्वती विवाहोत्सव पर आधरित नृत्य देखने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। थिरकन के भाव श्रद्धालुओं के अंतर्मन को छू गए।