तबले पर पं. अभिषेक मिश्रा, सारंगी पर विनायक सहाय एवं हारमोनियम पर सुमित मिश्रा ने संगत की। संगीत समारोह का शुभारंभ हर वर्ष की तरह शहनाई वादन के साथ हुआ। दिल्ली के बांसुरी वादक रितेश प्रसन्ना राग गोरख कल्याण के बाद एक धुन से समापन किया। तबले पर पं. अभिषेक मिश्रा रहे।
देर रात तक विदुषी कमला शंकर का गिटार, पं. देवाशीष डे, पं. गणेश प्रसाद मिश्र, चारुचंद्र सिंह का गायन, प्रो. राजेश शाह का सितार, सम्यक पाराशरी का बांसुरी और कोलकाता के शुक्ल दत्ता एंड ग्रुप की कथक की प्रस्तुति हुई। संचालन प्रीतेश आचार्य एवं सोनू झा ने किया। इस मौके पर संजय दुबे, विकास दुबे, प्रकाश दुबे आदि उपस्थित रहे।
मां का पंचमेवा की माला से शृंगार, 11 भूदेवों ने वेद पाठ
मां कूष्माण्डा दुर्गा देवी का पट डमरुओं की गड़गड़ाहट के बीच रात को आठ बजे खुला तो चहुंओर मां की जय जयकार से मंदिर परिसर गूंज उठा। मंदिर के महंत राजनाथ दुबे एवं पं. विश्वजीत दुबे ने शृंगार करवाया। मां की स्वर्णमयी प्रतिमा का पंचामृत एवं पंचगव्य स्नान कर कोलकाता के विशेष गुलाब, बेला, कमल पुष्पों से शृगार हुआ। पंचमेवा की माला अर्पित की गई। छप्पन भोग की दिव्य झांकी सजाई गई। मां की विराट आरती उतारी हुई।
वैदिक आचार्यों ने चारों वेदों के मंगलाचरण के बाद आचार्य श्रीधर पाण्डेय एवं बलभद्र तिवारी के आचार्यत्व में पं. हेमंत त्रिपाठी हंडी महाराज सहित 11 वैदिक भूदेवों ने वेद पाठ किया। आरती पं. किशन दुबे एवं कौशलपति द्विवेदी ने किया। वहीं, कोलकाता के कारीगरों ने मंदिर परिसर को फूल बंगले के स्वरूप प्रदान कर आकर्षक सजावट की थी।