ठुमरी साम्राज्ञी को दी स्वरांजलि
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ठुमरी साम्राज्ञी पद्मविभूषण गिरिजा देवी की गायकी में उनके प्रकृति और गंगा के प्रति प्रेम को संगीत के माध्यम से स्वरांजलि दी गई। रविवार को प्रकृति फाउंडेशन की ओर से गंगा की पावन धारा के मध्य बजड़े पर आयोजित कार्यक्रम में गीत और संगीत के माध्यम से भावांजलि प्रस्तुत की गई।
गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए संकल्प भी लिया गया। कार्यक्रम की शुरूआत ठुमरी साम्राज्ञी की शिष्या डा. ममता शर्मा ने जय-जय हे शिव परम पराक्रम से की। इसके उपरांत उन्होंने राग पुलु पर ठुमरी नदियां किनारे मेरो गांव कब आइयो घनश्याम सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अगली प्रस्तुति दादरा दीवाना किया श्याम, क्या जादू डाला, गंगा तोहार पानी रहल अमृत, दिनवा में सोना लगे रतिया में चांदी जैसे गीतों के माध्यम से प्रकृति और संस्कृति को नमन किया। तबले पर पं. नंद किशोर मिश्रा और हारमोनियम पर विजय शर्मा ने संगत की।