पं. किशन महाराज की पुण्यतिथि पर संगीत समारोह का आयोजन
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नाद ब्रह्म के उपासक प्रख्यात तबला वादक पद्मविभूषण पं. किशन महाराज की पुण्यतिथि पर संगीत सभा काशी के दो दिवसीय संगीत समारोह के अंतिम दिन सोमवार को अकरम खां ने तबले और सोहनी चक्रवर्ती ने कंठ संगीत से संगीतांजलि दी। कलाकारों ने अपने सुर-साज में उनकी स्मृतियों को सजाकर वंदन किया।
सनबीम स्कूल लहरतारा में आयोजित समारोह में पंडित जी के तैलचित्र पर उनके पुत्र पं. पूरण महाराज, दीपक मधोक, भारती मधोक, नामधारी सुखविंदर सिंह, जतिंदर पाल सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरविंदर सिंह और माला श्रीवास्तव ने पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। नाद मंजरी में पंडित जी की पोती अवंतिका महाराज, आर्यमन मिश्रा, अनमोल श्रीवास्तव, उत्कर्ष तिवारी और आरुष ने वाद्ययंत्रों से उन्हें नादांजलि अर्पित की।
कोलकाता की सोहिनी चक्रवर्ती ने राग खमाज में ठुमरी से गायन की शुरुआत की। राग काफी में टप्पा के बाद दादरा—‘प्यारा रे मोरी गुइयां...’ से गायन का समापन किया। तबले पर गौरव चक्रवर्ती, सारंगी पर अनीश मिश्रा और हारमोनियम पर जमुना वल्लभ दास गुजराती ने संगत की। इसके बाद देश के जाने-माने अजराड़ा घराने के तबला वादक उस्ताद अकरम खां ने अपने एकल तबला वादन से तबला सम्राट को नमन किया।
तीनताल के बाद अपने घराने के पारंपरिक उठान, कायदा, रेला, तिहाई की बेजोड़ प्रस्तुति दी। तबले पर उनकी उंगलियों की परिष्कृत थिरकन ने एक-एक बोल को करीने से सजाकर श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया। हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्रा ने संगत की। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।