जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज
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ज्योतिष और द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की हत्या को जघन्यतम करार दिया है। इस तरह की घटना से अब यह सवाल उठता है कि क्या संत महात्मा अब स्वच्छंद भ्रमण भी नहीं कर सकते हैं। दुख की बात तो यह है कि पुलिस की मौजूदगी में यह घटना हुई।
जब उनके प्राण ही चले गए तो अब न्याय किसको मिलेगा। इसमें पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से उत्तरदायी है। प्रदेश सरकार को इस मामले में सख्ती के साथ दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए जिससे कि दोबारा इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति ना हो। महाराष्ट्र में जूना अखाड़ा के संत धार्मिक कार्य से जा रहे थे। एकाएक भीड़ ने उन पर हमला बोल दिया और जब तक उनके प्राण नहीं चले गए उन पर डंडे बरसते रहे। यह जघन्यतम और दंडनीय अपराध है।