हिरासत में लिए गए दोनों युवकों ने पुलिस को बताया कि नीलेश का शव करखियांव गांव में ही एक पोखरे में फेंका गया है। दोनों से मिली जानकारी और उनकी निशानदेही के आधार पर शाम के समय पुलिस पोखरे पर पहुंची और नीलेश का शव बरामद किया। हालांकि नीलेश की बाइक और मोबाइल नहीं बरामद किया जा सका है।
उधर, नीलेश की मां मंजू सिंह की हालत बेसुधों जैसी थी और परिजन बड़ी ही मुश्किल से उन्हें संभाले हुए थे। एसीपी पिंडरा अमित पांडेय ने कहा कि प्रकरण उधार दिए गए रुपये के लेनदेन के विवाद से जुड़ा है। एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
बड़े भाई अश्वनी सिंह ने बताया कि नीलेश पांच मिनट में घर आने की बात कह कर गया था। आधा घंटे बाद भी वह नहीं आया तो रात नौ बजे उसके मोबाइल पर हमने फोन किया, लेकिन कॉल नहीं रिसीव हुई। इसके बाद 9:30 बजे फोन किया, लेकिन फिर भी कॉल नहीं रिसीव हुई। रात 10 बजे के बाद नीलेश का मोबाइल स्विच ऑफ बताने लगा तो हम लोगों ने उसके दोस्तों और करीबियों से उसके बारे में पता लगाते हुए उसे खोजना शुरू किया।