कभी न भूलने वाले किरदारों को जना, उसे न जाने कितने साल से म्यूजियम बनाने की तैयारी चल रही है। मुंशी जी की 125वीं जयंती पर उनके आवास को म्यूजियम बनाने का दावा किया गया था लेकिन इन सालों में उधड़ चुकी दीवारों की मरम्मत कर उन पर पुताई ही हुई है। 2019 में भी चार करोड़ 80 लाख रुपये से संग्रहालय बनाने की घोषणा तत्कालीन जिलाधिकारी ने की। साल बीतने को है लेकिन धरातल पर घोषणाओं की एक ईंट तक नहीं रखी गई।
मुंशी जी के घर के ठीक सामने आलीशान मुंशी प्रेमचंद मेमोरियल रिसर्च सेंटर का ठूंठ भवन खड़ा है। ठूंठ इसलिए क्योंकि यह भवन अपनी सार्थकता सिद्ध नहीं कर पा रहा। केंद्र सरकार की पहल पर इस रिसर्च सेंटर की स्थापना इस उद्देश्य से की गई कि यहां मुंशी प्रेमचंद पर उनके उपन्यास, कहानियों और किरदारों पर शोध हो सके। चार साल बीतने के बाद भी शोध तो छोड़िए पुस्तकालय में तो किताबें तक नहीं हैं।
कथा सम्राट की जयंती के पूर्व अधिकारी सक्रिय हो जाते हैं लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण जन्मस्थली के सारे आयोजन आनलाइन हो गए हैं। प्रेमचंद स्मारक न्यास लमही के अध्यक्ष सुरेश चंद्र दुबे कहते हैं कि हर बार घोषणाएं होती हैं लेकिन जमीन पर आज तक कोई बदलाव नजर नहीं आया है।