शब्द, संवाद में भरे भाव को किस्सागोई में गढ़ना सिखाया
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न कोई मंच, ना कोई अभिनेता...। लेकिन, कहानी सीधे दिल में उतर जाती है। कुछ ऐसे ही कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘मंत्र’ को किस्सागोई में बड़ी ही खूबसूरती से पिरोया ‘मंत्र’ के डॉ. चड्ढा के उन्माद, उनके गुरूर को, बूढ़े भगत की गिड़गिड़ाहट को किस्सागो डॉ. ब्रजेश पाठक ने। शब्दों, भावों और संवाद को किस्सागोई में ऐसा गढ़ा जैसे सभी पात्र सामने मंच पर अपने किरदार निभा रहे हों।
सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में छात्रों को भावों से भरे शब्द व संवाद को किस्सागोई में गढ़ना सिखाया गया। संस्कृति मंत्रालय की ओर से सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र की ओर से विद्यालयों में रंगमंच, क्रिएटिव राइटिंग और किस्सागोई का प्रशिक्षण दूसरे दिन भी चला।
गुरु नानक खालसा इंटर कॉलेज में थिएटर की क्लास चली। यहां स्वाति विश्वकर्मा ने छात्राओं को अलग अलग सीन दिए और उस पर अभिनय की बारीकी सिखाईं।
इसी तरह निवेदिता शिक्षा सदन बालिका इंटर कॉलेज, राधा किशोरी इंटर कॉलेज में थिएटर, गंगापुर इंटर कॉलेज में सृजनात्मक लेखन, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में रंगमंच की कक्षाएं चलीं जिसमें थिएटर, रंगमंच, क्रिएटिव राइटिंग के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षित किया। शुक्रवार को इस प्रशिक्षण का अंतिम दिन है। ब