मुन्ना बजरंगी और उसका गिरोह पूर्वांचल के साथ ही प्रदेश भर में डॉक्टरों और कारोबारियों से रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यात था। रंगदारी से हुई वसूली को रियल इस्टेट क्षेत्र में निवेश किया जाता था।
बनारस सहित पूर्वांचल से लेकर लखनऊ तक पुलिस ने कई ऐसे बिल्डरों और प्रॉपर्टी डीलर को चिह्नित कर रखा है, जिनके काम में बजरंगी की काली कमाई लगी हुई है।
बीते साल बदमाशों की गोली का शिकार हुआ मोहम्मद तारिक ठेकेदारों से प्रोटेक्शन मनी वसूल कर उसे रियल इस्टेट क्षेत्र में निवेश करता था। जानकारों का कहना है कि बजरंगी की हत्या के बाद पूर्वांचल में बरसों से जारी रंगदारी वसूलने का धंधा मंदा पड़ेगा। दूसरी ओर पूर्वांचल में गैंगवार की आशंका बढ़ गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बजरंगी की हत्या का बदला लेने के लिए उसके कुछ खास गुर्गे आतुर होंगे। गिरोह की कमान संभालने के लिए गुर्गों के बीच भी गैंगवार हो सकती है। इसके मद्देनजर जोन के दस जिलों की पुलिस को एलर्ट कर दिया गया है।
रंगदारी मांगने के अलावा पीडब्ल्यूडी, डीएलडब्ल्यू और रेलवे से जुड़े ठेकेदारों से बजरंगी प्रोटेक्शन मनी वसूलता था। बजरंगी को कमीशन दिए बगैर पूर्वांचल में पीडब्ल्यूडी और रेलवे के ठेके से जुड़े काम कोई ठेकेदार लेने की हिम्मत नहीं कर सकता था।
पुलिस के अनुसार डीरेका के कर्मचारी नेता टीके मुकेश की हत्या में रासुका के तहत निरुद्ध डब्लू और बबलू राय ने भी बजरंगी के बल पर ही अपना आर्थिक साम्राज्य खड़ा किया था।