नगर निगम मिनी सदन की मंगलवार को हुई नए साल की पहली बैठक में सड़क, सीवर, दूषित पेयजल आपूर्ति जैसी बुनियादी समस्याओं से जुड़े मुद्दे जगह नहीं पा सके। हालांकि 65 मिनट चली कार्यवाही के दौरान नगर निगम के सीमा विस्तार पर मिनी सदन ने मुहर लगा दी। साथ ही, मोबाइल टावरों से शुल्क वसूलने के प्रस्ताव को भी पारित कर दिया गया।
इन दोनों प्रस्तावों के पारित होने के बाद बैठक पहले बुधवार को एक बजे तक और फिर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सपा और कांग्रेस पार्षदों ने इसका विरोध करते हुए कार्यवाही जारी रखने की मांग की। जब उनकी नहीं सुनी गई तो वे हंगामा करते हुए सभापति मेयर रामगोपाल मोहले के आसन तक पहुंच गए। इस दौरान भाजपा पार्षदों से उनकी धक्कामुक्की भी हुई।
मिनी सदन की कार्यवाही दोपहर 1:05 बजे शुरू हुई। सपा पार्षद दल के मुख्य सचेतक शंकर विशनानी और नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी ने सभी को नए साल की शुभकामना दी। नगर निगम सीमा विस्तार संबंधी प्रस्ताव को इस शर्त के साथ पारित किया गया कि सभी 78 गांवों में सरकार बुनियादी सुविधाएं देगी और उनकी सार्वजनिक संपत्तियों का मालिकाना हक नगर निगम के पास होगा।
बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त होने के बाद ही इन गांवों से कर वसूला जाएगा। इसके बाद अपने घरों की छतों पर मोबाइल टावर लगाने वालों से टैक्स वसूलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रति मोबाइल टावर न्यूनतम बीस हजार रुपये सालाना की दर से नगर निगम कर वसूलेगा।
अब नए टावर लगाने के लिए नगर आयुक्त की अनुमति जरूरी होगी। सभी पार्षदों ने इस पर एकजुटता दिखाई कि टावर शुल्क भवन स्वामी से नहीं बल्कि संबंधित कंपनी से वसूला जाए। इन दोनों प्रस्तावों के बाद नगर आयुक्त केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की वीडियो कान्फ्रेंसिंग में चले गए।
इसके बाद कांग्रेस और सपा पार्षदों के विरोध के बीच महापौर ने मिनी सदन की बैठक स्थगित कर दी। उधर, मिनी सदन की बैठक के दौरान संविदा सफाई कर्मियों ने निगम परिसर में प्रदर्शन कर वेतन वृद्धि सहित अन्य सुविधाओं का लाभ देने की मांग उठाई।