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Varanasi: नगर निगम का कूड़ा सेग्रिगेशन पर जोर, रखे जाएंगे चार रंग के डस्टबिन; नगर आयुक्त ने दिया ये निर्देश

Sat, 07 Mar 2026 01:26 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम का लक्ष्य है कि सोर्स सेग्रिगेशन यानी घर से ही कचरा अलग-अलग होकर निकले। इसके लिए जागरूकता स्टिकर घरों के बाहर लगाए जा रहे हैं। 
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डस्टबिन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी नगर निगम स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग के लिए लगातार प्रयासरत है। इसके लिए जनसहभागिता बेहद जरूरी है। इसे देखते हुए निगम अब प्रत्येक वार्ड में चार अलग-अलग श्रेणियों के डस्टबिन और जागरूकता स्टिकर वितरित करने का निर्णय लिया है ताकि शतप्रतिशत कूड़े का पृथक्करण (सोर्स सेग्रिगेशन) किया जा सके। हरे रंग के डस्टबिन में किचन का गीला कूड़ा रखा जाएगा। इसी प्रकार घर का अन्य सूखा कचरा नीले रंग के डस्टबिन में रखेंगे। इसके अलावा लाल रंग के डस्टबिन में बायोमेडिकल कचरा रखा जाएगा। इसके अलावा घरेलू खतरनाक कचरा काले रंग के डस्टबिन में रखा जाएगा।

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स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम का लक्ष्य है कि सोर्स सेग्रिगेशन यानी घर से ही कचरा अलग-अलग होकर निकले। इसके लिए जागरूकता स्टिकर घरों के बाहर लगाए जा रहे हैं। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जो नागरिक इस नियम का पालन करेंगे, उन्हें प्रोत्साहित किया जाए और जो सहयोग नहीं कर रहे हैं, उन्हें स्वच्छता के नियम का पाठ पढ़ाया जाए। 

इस क्रम में अपर नगर आयुक्त सविता यादव ने स्वास्थ्य विभाग से प्रत्येक वार्ड के लिए चार रंगों के कूड़ेदान (बिन्स) जारी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने अभियान के पहले चरण में प्रत्येक वार्ड के कम से कम 30 ऐसे भवन स्वामियों को चिह्नित करने को कहा जो शत-प्रतिशत कूड़ा पृथक्करण का पालन कर रहे हैं या इसके लिए तत्पर हैं।
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इन नागरिकों को मॉडल के रूप में डस्टबिन और जागरूकता स्टिकर भी दिए जा रहे हैं, ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हो सकें। इस प्रक्रिया की मॉनिटरिंग के लिए व्हाट्सएप ग्रुप और निर्धारित प्रारूप का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे वार्डों में जाकर सीधे लोगों को गीला, सूखा, बायोमेडिकल और हानिकारक कचरा अलग रखने के लिए जागरूक करें।

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1000 टन में से 15 खतरनाक और 10 प्रतिशत आता बायो मेडिकल कूड़ा

नगर निगम की ओर से प्रतिदिन 1000 टन कूड़ा शहर से उठाया जाता है। इनमें 40 प्रतिशत गीला कूड़ा होता है। इसके अलावा 35 प्रतिशत सूखा कूड़ा होता है। खतरनाक कूड़ा 15 प्रतिशत और बायोमेडिकल में 10 प्रतिशत कूड़ा होता है। ज्यादातर कूड़ा मिश्रित आता है। जिसे करसड़ा प्लांट पर ले जाकर छंटाई की जाती है। इसके बाद इसका निस्तारण होता है।

क्या कहते हैं अधिकारी  
कूड़ा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी मुख्य सफाई एवं खाद्य निरीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वह डस्टबिन वितरण और स्टिकर चिपकाने की फोटो साक्ष्य के साथ रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराएं। -सविता यादव, अपर नगर आयुक्त
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