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मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जेलों में बंद मुख्तार अंसारी के गुर्गों की नींद हराम

Fri, 13 Jul 2018 10:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी/जौनपुर
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बजरंगी की हत्या के बाद साथी बंदियों को नहीं कर रहे परेशा
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 बागपत जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद पूर्वांचल की जेलों में कैद मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी के गुर्गे दहशत में आ गए हैं। अनहोनी की आशंका से गुर्गे रात भर सो नहीं पा रहे हैं। और तो और, बात-बात पर अकड़ने वाले मुख्तार के गुर्गों के तरीके में भी बदलाव आया है।
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तब्दीली कारागार प्रशासन के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए हैरत भरी तो है लेकिन फिलहाल इन्हें सुकून है।  विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोपियों में से एक मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद इस मामले के अहम आरोपी मुख्तार अंसारी और जेल में बंद उनके गिरोह के गुर्गों में खलबली मच गई।

मौजूदा समय में बनारस सहित पूर्वांचल की अन्य जेलों में मुख्तार के गुर्गों मेें से अंगद राय, भीम राय, गोरा राय, हनुमान पांडेय, राजू कन्नौजिया, जामवंत कन्नौजिया, अमरेश कन्नौजिया, अनुज कन्नौजिया सहित कई अन्य निरुद्ध हैं।
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जेल सूत्रों के अनुसार बजरंगी की हत्या के बाद मुख्तार के सारे गुर्गे सकते में हैं और अपना दायरा बैरक तक ही सीमित कर लिए हैं।
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आपस में ही खूनी भिड़ंत की आशंका

- फोटो : file photo
मुन्ना बजरंगी पूर्वांचल में सर्वाधिक शूटरों वाला सरगना था। बजरंगी की गैंग के शूटर मनबढ़ और अड़ियल रवैये के साथ ही नृशंस तरीके से वारदातों को अंजाम देने के लिए कुख्यात रहे हैं। बजरंगी की हत्या के बाद उसके गुर्गे बेलगाम हैं।

इसे लेकर पुलिस को गैंगवार की आशंका है। चर्चाएं यह भी हैं कि बजरंगी की काली कमाई के स्रोतों पर अधिपत्य जमाने के लिए उसके गुर्गे आपस में खूनी संघर्ष भी कर सकते हैं। 

बदला लेने की कसम से गैंगवार की आशंका
मंगलवार को मणिकर्णिका घाट पर मुन्ना बजरंगी के अंतिम संस्कार के दौरान कुछ ऐसे लोग भी थे जो खासे गुस्से में थे और उनका कहना था कि भैया की कसम, हम बदला जरूर लेंगे।
 
बताया जा रहा है कि इसके लिए मुंबई के शूटरों को तैयार रहने को कहा गया है। ऐसे में आगामी दिनों में पूर्वांचल में गैंगवार की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
 

बजरंगी गिरोह के गुर्गे जान की हिफाजत को लेकर आशंकित

- फोटो : अमर उजाला
पुष्पजीत सिंह उर्फ पीजे, मोहम्मद तारिक और अब मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद इस गिरोह के गुर्गों को खुद की जान का भय सताने लगा है। चर्चाएं हैं कि गिरोह से जुड़े कई गुर्गे पाला बदलने की तैयारी में हैं और जल्द ही नए आकाओं की शरण मेें जाकर पनाह ले सकतेे हैं।

इन हालात में बजरंगी गिरोह का अस्तित्व दांव पर लगा हुआ है। ऐसे में आगामी दिनों में यह देखने लायक बात होगी कि किसी बड़ी वारदात को अंजाम देकर बजरंगी गिरोह जरायम जगत में सशक्त तरीके से वापसी करता है या फिर सब कुछ बिखर जाएगा।

बजरंगी की हत्या के बाद पुलिस और एसटीएफ उसके गुर्गों की गतिविधियों पर नजरें गड़ाए बैठी हुई हैं। 
 

झांसी जेल प्रशासन को पहले से थी जेल में हमले की भनक

मुन्ना बजरंगी - फोटो : SELF
 झांसी जेल में बंद मुन्ना बजरंगी पर हमले की भनक झांसी प्रशासन को लग गई थी। प्रशासन ने मुन्ना से मिलने जुलने वालों पर शिकंजा कसना शुरू दिया तो प्रतापगढ़ और जौनपुर के कई नेता, प्रदेश के अधिकारियों की सिफारिश होने लगी।

जौनपुर के एक विधायक ने प्रदेश के एक मंत्री से सिफारिश की कि झांसी जिले का प्रशासन मुन्ना बजरंगी को परेशान कर रहा है। मंत्री ने जब डीएम एसपी से पूछा कि सच्चाई क्या है तो उन्होंने बताया कि अगर सख्ती नहीं की जाएगी तो मुन्ना बजरंगी पर हमला जेल में ही हो जाएगा।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि ऐसा इनपुट उन्हें खुफिया एजेंसियों से मिला है। इसके बाद मंत्री ने अपनी बात वापस ले ली और विधायक को ऐेसे लोगों की सिफारिश भविष्य में नहीं करने की चेतावनी दी।

पैरवी करने वालेे विधायक मुन्ना बजरंगी के हत्या के बाद न तो उसके घर दिखे और न ही अंतिम संस्कार में ही शामिल हुए। वैसे भाजपा के इस विधायक के रिश्ते मुन्ना से जग जाहिर हैं। एसटीएफ विधायक और मुन्ना बजरंगी के रिश्ते की पड़ताल कर रही है।

बजरंगी की मौत से पूर्वांचल में रगंदारी के बड़े नेटवर्क को झटका

- फोटो : अमर उजाला
माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या पर भले हीसवाल खड़े हो रहे हों पर उसकी मौत से पूर्वांचल में रंगदारी और गुंडा टैक्स वसूली से जुड़े बडे़ नेटवर्क को झटका लगा है। माना जा रहा है कि मुन्ना की मौत से खासकर पूर्वांचल के दो दर्जन से अधिक जिलों के अलावा बिहार के सीमावर्ती इलाकों तक फैला नेटवर्क कमजोर होगा।

मुन्ना बजरंगी ने जरायम की दुनिया में हत्या व लूट केजरिये एंट्री की लेकिन दबदबा कायम करने के बाद उसका पूरा फोकस धनाढ्यों से वसूली पर ही रहा। पहले उसके निशाने पर व्यवसाइयों के साथ-साथ मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोग रहे।

फिर रंगदारी और गुंडा टैक्स की वसूली के लिए उसने अपना दायरा अन्य वर्गों में भी बढ़ाया। जैसे-जैसे वसूली नेटवर्क बढ़ा, उसी अनुपात में उसके गैंग भी फलता-फूलता गया।

पुलिस सूत्रों की मानें तो वर्तमान में बजरंगी के वसूली नेटवर्क की जद में पूर्वांचल के सैकड़ों डाक्टर, रियल स्टेट के कारोबारियों केअलावा कालीन, होटल, साड़ी व आभूषण के  व्यापारी हैं। मुन्ना की मौत के बाद इन्हें अब राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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श्री प्रकाश शुक्ला जैसा होगा मुन्ना बजरंगी गैंग का हश्र!

- फोटो : अमर उजाला
मुन्ना बजरंगी गैंग का हश्र  भी माफिया डॉन श्री प्रकाश शुक्ला गैंग जैसे ही होने की अटकलें जरायम से जुड़े लोग और पुलिस अधिकारी लगा रहे हैं। कुछ स्थितियां दोनों की एक जैसी हैं। सीएम की सुपारी लेने के बाद एसटीएफ ने सितंबर 1998 में श्री प्रकाश शुक्ला को मार गिराया।

ठीक उसकी तरह मुन्ना बजरंगी भी कुछ सफेदपोशों को मारने की प्लानिंग बना चुका था। अगर उसके शूटर बिहार में नहीं पकड़ जाते तो हमला तय था। वर्ष 1990 से लेकर 1998 तक पूरे यूपी में श्री प्रकाश का और 1995 से लेकर 2018 तक मुन्ना बजरंगी का आतंक ऐसा रहा जिसके आगे कोई भी बदमाश टक्कर लेने की नहीं सोच पाया।

प्रकाश शुक्ला  की मौत के बाद पूरा गैंग तितर बितर हो गया। ठीक उसी तरह मुन्ना गैंग का भी हश्र होना तय माना जा रहा है। मुन्ना बजरंगी के पास भी ऐसा कोई चेहरा नहीं है जो कमान संभाल सके। जिन नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं उनसे मुन्ना के दूर-दूर के रिश्ते नहीं हैं।

मुन्ना बजरंगी की जेल में हुई हत्या के बाद पूरे प्रदेश की जेलों में बंद बड़े अपराधियों में खलबली मची है। मुन्ना गिरोह के शूटर प्रतिशोध में हैं जरूर लेकिन जेल में होने की वजह से वह छटपटा रहे हैं। जो बाहर लोग हैं वह पूरी तरह से कामर्शियल हैं। अब मुन्ना की हत्या के बाद अपने को अलग कर किसी पचड़े में नहीं पड़ना चाहते। 
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