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Mukhtar Ansari: अदालत में बचाव पक्ष की दलील, कम से कम सजा मिले; क्रिमिनल हिस्ट्री को लेकर दिया ये तर्क

Wed, 13 Mar 2024 07:04 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

Mukhtar Ansari: बचाव पक्ष की ओर से यह भी कहा गया है कि अभियुक्त अत्यंत वृद्ध व बीमार है और कई वर्षों से जेल में निरुद्ध है। इसलिए अभियुक्त को न्यूनतम दंड से दंडित किया जाए। बचाव पक्ष द्वारा क्रिमिनल हिस्ट्री का भी विरोध किया गया और तर्क दिया गया कि वर्तमान प्रकरण में घटना वर्ष 1986-87 की है, जब अभियुक्त की आयु लगभग 22 वर्ष रही होगी।
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मुख्तार अंसारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता ने कहा कि न्यायालय द्वारा उनके मुवक्किल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2) में दोषमुक्त किया है। शेष धाराएं मजिस्ट्रेट द्वारा परीक्षणीय हैं। अतः इस न्यायालय को दंड के प्रश्न पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है।

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उन्होंने यह भी तर्क दिया गया कि प्रकरण में अभियुक्त पर कोई स्वयं से कार्य करने का अपराध नहीं है और न ही कथित सह-अभियुक्त के साथ इनका एक साथ विचारण किया गया है। अभियुक्त को मात्र लाभार्थी मानते हुए बिना किसी प्रत्यक्ष साक्ष्य के दोष सिद्ध किया गया है।



कहा गया है कि अभियुक्त अत्यंत वृद्ध व बीमार है और कई वर्षों से जेल में निरुद्ध है। इसलिए अभियुक्त को न्यूनतम दंड से दंडित किया जाए। बचाव पक्ष द्वारा क्रिमिनल हिस्ट्री का भी विरोध किया गया और तर्क दिया गया कि वर्तमान प्रकरण में घटना वर्ष 1986-87 की है, जब अभियुक्त की आयु लगभग 22 वर्ष रही होगी।
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उस समय के आपराधिक इतिहास को ही विचारित किया जा सकता है, जबकि उक्त वर्ष का कोई भी आपराधिक इतिहास अभियुक्त का नहीं है। अत: ऐसी दशा में घटना के बाद दर्शित समस्त आपराधिक प्रकरणों को दंड के प्रश्न पर विचारित नहीं किया जा सकता।

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