मौके पर मौजूद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी।
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डीएम ने कहा कि आज से करीब 50 दशक पहले हुए चकबंदी में फत्तेउल्लाहपुर में सरकारी तालाब की जमीन को कु्छ लोगों ने गलत तरीके से अपने नाम दर्ज करवा लिया था। इस जमीन के पांच बीघा एरिया को मुख्तार और दूसरे लोगों ने गलत तरीके से खरीदा और इस पर खाद्यान्न गोदाम बना लिया गया। जब अफसरों को इसकी भनक लगी, तो वे जांच करने पहुंचे।
जांच में पता चला कि 32 बीघा तालाब के रूप में अंकित जमीन से 15 बीघा जमीन को गलत तरीके से इंद्राज करा लिया गया है। इस जमीन को मेसर्स विकास कंस्ट्रक्शन कंपनी ने खरीदा और इसके पार्टनर जाकिर हुसैन, अफसा बेगम, रवि नारायण सिंह आदि करीब आधे दर्जन लोग बने। जिस पर खाद्यान्न गोदाम का निर्माण कर संचालित किया जा रहा था।
डीएम ने बताया कि अतिक्रमण का कुछ हिस्सा धराशायी करते हुए अतिक्रमण मुक्त कर दिया गया है। बाकी जमीन भी जल्द ही खाली करवाई जाएगी। अतिक्रमणकारियों के कब्जे से जमीन मुक्त कराने के बाद उसे ग्राम पंचायत को सौंप दिया गया है। डीएम ने यह भी बताया कि 1970 में हुए चकबंदी में इस फर्जीवाड़े में जिन-जिन लोगों की भी भूमिका थी, उनके ऊपर उचित कार्रवाई की जाएगी।