जुलूस में मेहंदी बाख्त, असद बाख्त, इकबाल हुसैन, हैदर मौलाई, इमरान हुसैन, जैदी शकील, हुसैन जैदी, जफर हसन, शकील अहमद जादूगर आदि शामिल रहे। 250 साल साल कदीमी दूसरा जुलूस शिवाला इमामबाड़े से रात में उठाया गया। हाजी अंसार हुसैन रिजवी ने मजलिस खिताब किया।
अंजुमन गुलजार ए अब्बासिया के नौहाख्वानों ने दर्द भरे नौहे के साथ सीनाजनी कर मातम पेश किया। जुलूस पारंपरिक रास्तों से होते हुए गलियों होकर मस्जिद के पास से गुजरा और शिवाला घाट से छेड़ी टोला में दाखिल हुआ। जुलूस हरिश्चंद्र घाट के पास कुम्हार के इमामबाड़े पर पहुंचा।
अजादारों ने अलम व ताबूत को रखकर जुलूस को ठंडा किया। यही पाक ताजिया 10वीं मुहर्रम (यौमे आशुरा) को उठाया जाएगा। तीसरा जुलूस रामनगर में उठा। रात में वारीगढ़ी स्थित सगीर अहमद के निवास से अलम, दुलदुल और ताबूत का जुलूस की जियारत के लिए अंजुमनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मातम किया। रास्ते में अजादारों और जियारत मंदों भीड़ उमड़ी रही। इस दौरान कड़ी सुरक्षा रही।
आज यहां से उठेगा जुलूस
चौथी मुहर्रम को पहला जुलूस चौहट्टा लाल खान से दोपहर में इमामबाड़े से अलम व ताबूत का उठेगा। दूसरा शिवाला के मोहल्ला करमटीला से सैयद आलिम हुसैन रिजवी के संयोजन में उठेगा। तीसरा चौहट्टा लाल खान मस्जिद से शाम को अलम, दुलदुल और ताबूत का जुलूस उठाया जाएगा। पहुंचकर समाप्त होगा।