वाराणसी में ताजिया जुलूस
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शिवपुर, बीएचयू, लंका आदि इलाकों से भी ताजिये कर्बला पहुंचकर ठंडे हुए। शाम चार बजे के बाद दरगाहे फातमान मार्ग पर खासी भीड़ उमड़ी रही। ताजिये के साथ ढोल, ताशा बजाते और युवा लाठी, डंडे, तलवार आदि के जरिये फन-ए-सिपाहगिरी का करतब दिखाते हुए चले रहे थे।
जुलूस के बाद देर शाम शिया समुदाय की ओर से शाम-ए-गरीबां की मजलिसें हुईं। दरगाहे फातमान में दिल्ली के मौलाना कमर सुल्तान और दालमंडी स्थित साबीर साहब के आवास पर मजलिस को प्रयागराज के मौलाना इरशाद अब्बास ने खिताब किया। उन्होंने शहीदान-ए-कर्बला का जिक्र किया। उधर, मरकजी सीरत कमेटी की ओर से नई सड़क स्थित खूजर वाली मस्जिद में जिक्र शोहदा-ए-कर्बला कार्यक्रम का हुआ।
सुन्नी समुदाय ने इमाम हुसैन की शहादत की याद में घरों में फातिहा और दुआख्वानी की। नफिल रोजा रखकर अकीदत पेश की। मगरिब की नमाज के बाद रोजा खोला। उन्होंने मलीदा व खिचड़ा पर फातिहा कर गरीबों में बांटा।
शिया समुदाय मजलिस, मातम व जुलूस निकालकर कर्बला के शहीदों को खेराजे अकीदत पेश किया। जगह-जगह से अंजुमनें अलम, ताबूत दुलदुल का जुलूस उठाए। अजादारों ने कमा, जनजीर से मातम किया। दोपहर में शहर की 29 अंजुमनों के जुलूस उठने लगे। अंजुमन हैदरी नई सड़क, अंजुमन जौव्वादिया कच्चीसराय, अंजुमन मातमी जौव्वादिया पितरकुडा से अलम, दुलदुल का जुलूस उठा। इस दौरान बड़े संग बच्चे भी सीनाजनी, खंजर, कमा से मातम कर रहे थे। खूनी मातम देख जियारतमंदों की आंखें नम हो गईं।
उधर, अर्दली बाजार इमामबाड़े से अंजुमन इमामिया के कमा व जंजीरी मातम देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। इस दौरान काफी भीड़ रही। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि 11वीं मुहर्रम को लुटे काफिले का जुलूस दालमंडी में रविवार सुबह 11 बजे से उठेगा।