मुफ्ती-ए-बनारस अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून भारत के संविधान की प्रस्तावना की मूलभावना का उल्लंघन करता है। हमारा संविधान देश के नागरिकों को बिना किसी धार्मिक भेदभाव के जीवन के सभी क्षेत्रों में समान अवसर प्रदान करता है। यह विधेयक देश की विभाजनकारी शक्तियों को बढ़ावा देने वाला है।
रविवार को पीलीकोठी में शहर के उलेमा, विद्वतजन और सामाजिक कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए मुफ्ती-ए- बनारस ने कहा कि यह हमारे बुजुर्गों द्वारा देश की अखंडता के लिए दी गई साझी शहादत देश की समृद्धि के लिए छोड़ी गई साझी विरासत एवं देश की संप्रभुता के लिए अपनाई गई साझी सकाफत के मूल्यों के भी विरुद्ध है।
बैठक में सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित करके बिल को वापस लेने की केंद्र सरकार से मांग की गई। इस दौरान जिलाधिकारी और एसएसपी को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया है कि भारतीय संविधान के खिलाफ इस काले कानून से हमारी राष्ट्रीय एकता, सहिष्णुता और भाईचारा खतरे में है।
यह कानून देश के नागरिकों के भेदभाव पैदा करने वाला और राष्ट्रहित के विरुद्ध है। इसके उपरांत बजरडीहा में घायल होने वालों से मिलने मुफ्ती ए बनारस के नेतृत्व में एक दल पहुंचा। बैठक के दौरान मुफ्ती नियाज अहमद कासमी, मौलाना अब्दुल्लाह नासिर कासमी, मौलाना नसीर अहमद सिराजी, खलीकुज्जमां, मौलाना हारून रशीद नक्शबंदी, मौलाना जियाउर्रहमान, मौलाना अहसन जमील मदनी आदि मौजूद रहे। संचालन इशरत उस्मानी ने किया। इसके अलावा डीएम और एसएसपी ने मदनपुरा में जमीयत उलेमा जिला बनारस के अध्यक्ष अब्दुल्ला नासिर कासमी के घर जाकर शान्ति व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग की अपील की।