जमीअत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि तीन तलाक का मुद्दा इतना गंभीर नहीं जितना इसे उछाला जा रहा है। महज टीआरपी के लिए मीडिया इस मुद्दे को हवा दे रही है।
ये मुद्दा धार्मिक है, इसलिए बेहतर होगा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और उलेमा दोनों मिलकर इस मामले में फैसला लें। सरकार हस्तक्षेप न करे। सुप्रीम कोर्ट को पर्सनल लॉ बोर्ड को इसका मौका दे। इससे ही कोई बेहतर रास्ता निकलेगा।
जमीअत उलमा की ओर से सोमवार को बेनियाबाग मैदान में आयोजित ‘तहफ्फुजे जम्हूरियत व इस्लाहे मुआशरा’ कांफ्रेंस में शिरकत करने आए मौलाना अरशद मदनी ये बातें नदेसर में सपा नेता इस्तकबाल कुरैशी के आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहीं।
उन्होंने कहा कि मीडिया तीन तलाक को इस कदर हवा दे रही है जैसे हर मुस्लिम महिला इसकी शिकार हो। जो लोग इसे मुद्दा बना रहे हैं, उन्हें ये मालूम होना चाहिए कि इस्लाम में भी तीन तलाक को सही नहीं करार दिया गया है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग टोपी व दाढ़ी रखकर तीन तलाक को लेकर इस्लाम की गलत व्याख्या कर रहे हैं। दरअसल वो उलेमा है ही नहीं। उनकी वजह से इस्लाम बदनाम हो रहा है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक को मुद्दा बनाने से बेहतर है कि सरकार सांप्रदायिक ताकतों को खत्म करने का प्रयास करे।
मुसलमानों को बेवजह दहशतगर्द मानकर जेल में ठूंस दिया जाता है, ये गलत है। मौलाना मदनी ने बताया कि गुजरात पुलिस ने कई मुस्लिम नौजवानों को गलत मुकदमों में फंसा दिया। कोर्ट ने उन्हें सजा तक सुना दी।
मदनी ने मुख्यमंत्री योगी द्वारा अवैध बूचड़खानों पर की गई कार्रवाई को सही करार दिया। कहा कि शरीयत में भी इसकी इजाजत नहीं है। प्रदेश सरकार के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि योगी सरकार अभी काम कर रही है।
उनके काम पर कोई राय देना जल्दबाजी होगी। उन्हें कम से कम पांच महीने का वक्त देना होगा।