मां की ममता, धैर्य, परिश्रम, हौसला का कोई सानी नहीं होता। अपने बच्चों के लालन-पालन से लेकर उसे शिक्षित कर कमाऊ बनाने का सपना हर मां सजोती हैं और अंतिम सांस तक उसके खैरियत की कामना भी करती हैं। बलिया जिले के सुखपुरा कस्बा की एक मां ने पति की मौत के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और बेटे को पढ़ा लिखा कर आईबी अफसर बनाया।
आज कस्बा के साथ ही आसपास के गांवों के लोग भी इस मां के हिम्मत व परिश्रम की दाद देते हैं।
कस्बा निवासी निशिराज सिंह आईबी अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। निशिराज के पिता भृगुनाथ सिंह कस्बा में ही स्टूडियो चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे।
निशिराज की उम्र करीब आठ साल थी तभी अचानक पिता का साया उठ गया और परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां इंदू सिंह की कंधों पर आ गया। निशिराज का से दो साल छोटा एक और भाई भी है। पति के मौत के बाद भी इंदू सिंह पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन उन्होंने बच्चों के सामने दु:ख नहीं दिखने दिया।
परिवार चलाने के साथ दो बच्चों की पढ़ाई-लिखाई आदि की बड़ी जिम्मेदारी इंदू के कंधों पर थी, लिहाजा उन्होंने घर में माला गूंथने का काम शुरू कर दिया। माला गुथाई से जो भी पैसे मिलते थे। उससे इंदू ने बच्चों की परिवरिश शुरु किया।
उन्होंने बच्चों के पढ़ाई-लिखाई में किसी तरह की कमी महसूस नहीं होने दिया। इंदू के लिए अब सब कुछ उसके दोनों बच्चे ही थे जिसे वह पढ़ा कर कमाऊ बनाने की सपना संजोए थी। बड़े बेटे निशिराज को पटना व इलाहाबाद में पढ़ाया।
मां की मेहनत आखिरकार रंग लाइ्र और एक दिन निशिराज आईबी अधिकारी बन गया। आज भी निशिराज अपनी हर सफलता का श्रेय मां को ही देते हैं। निशिराज ने बताया कि मां ने अपने दुख का साया हमलोगों पर नहीं पड़ने दिया और माला गूंथ कर पैसा इकट्ठा करके हम दोनों भाईयों के जरुरत को पूरा करती थीं।