वाराणसी। पुलवामा में आतंकी हमले में पति की शहादत की खबर मिली तो लगा था कि जिंदगी अब खत्म हो गई। कुछ बचा नहीं रह गया। मासूम बेटे आयुष और बूढ़े सास-ससुर का चेहरा दिखा तो लगा कि हार नहीं माननी चाहिए। आखिरकार शहीद की बीवी जो हूं। यह बातें कहते हुए तोफापुर गांव की रीनू यादव कुछ देर के लिए शांत हो गईं। फिर, खुद को संभालते हुए रीनू ने कहा कि बेटे को अच्छे से पढ़ाने के साथ ही अच्छे संस्कार देना है। अब सपना यही है कि आयुष बड़ा होकर डॉक्टर बन कर समाज सेवा करे और अपने शहीद पिता का नाम रोशन करें।
चौबेपुर क्षेत्र के तोफापुर गांव निवासी श्याम नारायण यादव के छोटे बेटे रमेश यादव सीआरपीएफ में कश्मीर में तैनात थे। 14 फरवरी 2019 को रमेश पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। शहीद रमेश की शहादत के सम्मान में प्रदेश सरकार ने उनकी पत्नी रीनू को जिलाधिकारी कार्यालय में कनिष्ठ सहायक के पद पर नियुक्त किया। रीनू ने कहा कि घर और बाहर दोनों जगह सामंजस्य बनाकर धीरे-धीरे जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ रही हूं। मां-बाप जैसे सास-ससुर का ध्यान रखती हूं और चार साल के बेटे आयुष की परवरिश में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही हूं। आयुष का दाखिला अच्छी स्कूल में कराना है। उसकी सोच-समझ विकसित हो तो उसे बताऊंगी और समझाऊंगी कि उसके पिता ने देश के लिए क्या किया था। उन्हीं की दिखाई राह पर आयुष को भी चलाऊंगी। आयुष डॉक्टर बन कर समाज के गरीब और वंचित लोगों की नि:शुल्क सेवा करेगा। आयुष की समाज सेवा ही उसके शहीद पिता की शहादत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।