पूर्व महंत स्व. कुलपति तिवारी के पुत्र और आयोजक पं. वाचस्पति तिवारी के सानिध्य में 11 वैदिक ब्राह्मणों ने माता गौरा की चल प्रतिमा का विशेष पूजन किया। वेदमंत्रों की गूंज के साथ माता को मंडप में विराजमान कराया। इसके बाद वैदिक रीति से अभिमंत्रित हल्दी मां को अर्पित की गई। हल्दी चढ़ाकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। महिलाओं के पारंपरिक मंगलगीत और सोहर गूंज उठे। गीतों में दुल्हन की विदाई, ससुराल और शुभकामनाओं के भाव झलक रहे थे।
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बनारसी वस्त्र, रत्नाभूषण और सिंदूरी आभा में सजीं गौरा
हल्दी के रस्म के साथ माता गौरा का शृंगार हुआ। मां को बनारसी वस्त्र, रत्नाभूषण, पुष्पमालाएं और सिंदूरी आभा से सुसज्जित कराया गया। मां के शृंगारित छवि के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। रस्म निभाने के लिए काफी संख्या में भक्त पहुंचे थे।