गंगा के घाटों से लेकर बाबा के दरबार तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। स्थानीय लोगों, तीर्थयात्रियों और सैलानियों को विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के अन्य मंदिरों व होटल-लॉजों तक पहुंचने में दिक्कत न हो इसका भी ख्याल रखा गया था। अधिकारियों का भ्रमण लगातार बना रहा। नागरिक सुरक्षा, एनसीसी के कैडेट भी दर्शनार्थियों की सेवा में लगे रहे।
मौसम के मिजाज को देखते हुए धाम में पेयजल की व्यवस्था की गई थी। धाम में मेडिकल कैंप भी लगाया गया था। वहीं, विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने सेवा शिविर लगाया। मैदागिन, बांसफाटक, गिरजाघर, चितरंजन पार्क के पास, जंगमबाडी, लक्सा, रथयात्रा आदि इलाकों में शिविर लगाकर स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सेवा में लगे रहे। चाय, पानी, फलाहार आदि वितरित किया गया।
दशाश्वमेध घाट पर सुबह कुछ समय के लिए बढ़ती भीड़ को गंगा घाट की तरफ जाने से रोका गया। उन्हें दूसरे घाटों की तरफ भेजा गया। भीड़ को देखते हुए गिरजाघर से पैदल प्रवेश पर भी करीब एक घंटे तक रोक लगाई गई। के लिए रोक दिया गया था। लोग आसपास की गलियों से जा रहे थे।