शंख, घंटा, नगाड़े के बीच गूंजे मां के जयकारे
- फोटो : अमर उजाला
वासंतिक नवरात्र की अष्टमी व नवमी तिथि पर रविवार को पांच लाख से अधिक भक्तों ने मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए। मां के महागौरी और सिद्धि दात्री के स्वरूप की पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं ने त्रिकोण परिक्रमा कर मां काली और अष्टभुजा के दर्शन किए। नौ दिन व्रत रखने वाले भक्तों ने हवन कुंड में आहुति डाली।
नवरात्र के आखिरी दिन भोर से ही धाम की सभी गलियां भक्तों से भर गईं। मंगला आरती के बाद से दर्शन पूजन का सिलसिला दिनभर चला। मां विंध्यवासिनी के दर्शन के बाद भक्तों ने त्रिकोण परिक्रमा की। काली खोह स्थित मां काली, अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां अष्टभुजा और राम गया घाट स्थित मां तारा देवी के दर्शन किए।
श्रद्धालुओं ने अष्टभुजा पहाड़, मोतिया तालाब व भैरव कुंड के पास बाटी चोखा बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। देश के कोने-कोने से विंध्यधाम आए माता के भक्त रविवार को पूर्णाहुति कर घरों को रवाना हुए। इस दौरान रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में प्लेटफार्म एक व दो पर यात्रियों की भीड़ जुटी रही।
वासंतिक नवरात्र में विंध्यधाम में भक्तों की भीड़ अधिक रहता है। इस दौरान होटलों में कमरे आसानी से नहीं मिल पाते हैं। नवरात्र के अंतिम दिन धाम के सभी होटलों से भक्तों के रवाना होने का सिलसिला शुरू होने से कमरे खाली हो गए।