वाराणसी। बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में तीन दिवसीय अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए महर्षि पाणिनी संस्कृत विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र पंडा ने कहा कि ज्योतिष में अंतरविषयक शोध की आवश्यकता है। ज्योतिष से जुड़े अप्रकाशित ग्रंथों को अनुवाद किया जाना चाहिए जिससे कि यूजीसी के मापदंडों का समुचित अनुपालन हो सके। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वेदों पर अभी और अध्ययन की आवश्यकता है।
अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि ज्योतिष और आयुर्वेद के जरिये भारत पुन: विश्व गुरू बन सकता है। ज्योतिष को विज्ञान से उत्कृष्ट मानकर समाज हित में इसके उपयोग पर विचार करना चाहिए। प्रो. राजमोहन उपाध्याय की स्मृति में आयोजित इस सम्मेलन में संकाय प्रमुख प्रो. जी आंजनेय शास्त्री ने कहा कि ज्योतिष एक जीवन पद्धति है। ये व्यक्ति, समाज, देश, विश्व से संबंधित क्रिया
कलापों में अंतर्निहित है। स्वागत पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सच्चिदानंद मिश्र, संचालन डा. विनय कुमार और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय ने किया। उधर, तकनीकी सत्र में डा. पीबीबी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि प्राच्य परंपराओं और तथ्यों को वैज्ञानिक पक्ष के साथ प्रदर्शित करने की जरूरत है। प्रो. नागेंद्र पांडेय ने कहा कि संहिता ज्योतिष पर अध्ययन और शोध करने की जरूरत है।