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मानस मसान कथा में संत मोरारी बापू ने कहा, मेरी यह कथा मुर्दों के लिए है...

Fri, 27 Oct 2017 05:08 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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मोरारी बापू - फोटो : अमर उजाला
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रामकथा मानस मसान शव को शिव बनाने वाली कथा है। जीवितों को तो कथा बहुत सुनाई जाती है लेकिन मेरी यह कथा मुर्दों के लिए है। इस मसान में जलने के लिए मुर्दा बनना पड़ता है।
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ये बातें संत मोरारी बापू ने कहीं। संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से डोमरी, रामनगर स्थित सतुआ बाबा की गौशाला परिसर में चल रही रामकथा मानस मसान में बापू ने मसान की महागाथा सुनाई।

मोरारी बापू ने कहा कि जीवन की कोई निश्चितता नहीं है लेकिन मृत्यु निश्चित है। जीवन सुख है तो मृत्यु उस सुख का सार है। जीवित लोगों के लिए युग-युग से रामकथा गाई जाती रही है लेकिन मेरी रामकथा मुर्दों के लिए है। मुर्दो के भी कान होते है और उनमें भी कुछ चेतना होती है।
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उन्होंने कहा कि रामकथा के माध्यम से जीवन को तलाशना चाहिए। यह वर्तमान का जवाब और भविष्य का मार्गदर्शन है। रामकथा अर्वाचीन समस्याओं के समाधान का माध्यम है, जो हर देश, हर काल और हर परिस्थिति में हमें सही मार्ग दिखाती है। पूरी रामचरित मानस सत्य, प्रेम और करुणा से लबालब है।

उन्होंने कहा कि राम नाम का सच्चा जापक वही है, जो समाज का शोषण नहीं करे बल्कि पोषण करे। संकीर्ण नहीं उदार बन कर रहे और सबका सहारा बने। बापू ने जीवन में सदाचार अपनाने की सीख दी।

कहा कि सदाचारी व्यक्ति सदा सुखी रहता है। दुखी वही होता है जो दूसरों की प्रगति को देखकर ईर्ष्या करता है। साधु की व्याख्या करते हुए कहा कि साधु बनना बहुत कठिन है। साधु वो है जिसको किसी का डर ना हो। साधु प्रभावित नहीं करता है बल्कि प्रकाशित करता है।

इसी तरह चेला बनना आसान है लेकिन गुरु बनना बहुत कठिन है। गुरु की शरण में जाने और उसके निर्णय को स्वीकार करने से मुक्ति मिलती है। इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, ट्रस्टी प्रकाश पुरोहित, सतुआ बाबा संतोष दास आदि ने व्यास पीठ की आरती उतारी।

मसान में जलने का अधिकार सिर्फ मुर्दों को

रामकथा सुनते लोग - फोटो : अमर उजाला

काशी में तो सब मुक्त हो जाते है। यहां जो जल रहे हैं वो असल में महादेव से ब्याह करने जा रहे हैं। मृत्यु एक प्रकार का पुण्य प्रताप है। मसान में जलने का अधिकार सिर्फ मुर्दों को है।

मुर्दे में छह बातें नहीं होतीं। मुर्दा कभी भी कामी, क्रोधी, लोभी नहीं होता है। मुर्दे में मद और मोह भी नहीं होता। बापू ने कहा कि मसान में प्रमुख रूप से चिता, काष्ठ और अग्नि होती है।

हमारे घरों में चिता तो नहीं लेकिन चिंता बहुत रहती है। चिंता चिता के समान है। चिता मुर्दे को और चिंता जीवित को जलाती है। घर में काष्ठ भले न हो लेकिन कई प्रकार के कष्ट जरूरत रहते हैं। इन कष्टों का होना मसान समान है। जीवन में भी आग है। किसी में जागृति होती है तो किसी में ग्लानाग्नि होती है।
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मानस मसान है

रामकथा में उपस्थ‌ित‌ि साधु - फोटो : अमर उजाला
बापू ने कहा कि रामकथा अत्यंत सनातन है और यह मसान है। मानस के बाल कांड में काम नहीं है। महर्षि नारद ने काम को हराया था लेकिन मसान में रहने वाले शिव ने काम को जलाकर भस्म किया।

अयोध्या कांड में क्रोध नहीं बल्कि बोध है। अरण्य कांड में लोभ नहीं है। यह मुनियों और त्यागियों का कांड है। किष्किंधा कांड में मद और अभिमान नहीं है। सुंदर कांड में मोह नहीं है तो लंका कांड में मदसर नहीं है।

मसान में काम नहीं राम होता है। वहां क्रोध नहीं बल्कि बोध होता है। रोग नहीं क्षोभ व ग्लानि होती है। वहां मद नहीं, विष्णुपद होता है, मोह नहीं संवेदना होती है। वहां मग्सर नही बल्कि ईश्वर होता है। मसान में श्रम नहीं, विश्राम होता है। इसलिए मसान महान है।
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