‘मानस मसान’ रामकथा में संत मोरारी बापू ने शनिवार को गंगा और बेटी दोनों को बचाने का आह्वान किया। कहा कि बेटियों के सम्मान से राष्ट्र में समृद्धि और खुशहाली आएगी। गंगा निर्मलीकरण के लिए युवाओं से आगे आने की अपील की। गंगा से पावन धारा कोई धारा नहीं है। तीर्थों को गंदगी से बचाना होगा।
संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से मणिकर्णिका घाट के सामने गंगा पार सतुआ बाबा के गोशाला परिसर में कथा के आठवें दिन बापू ने व्यास पीठ से सीता स्वयंवर प्रसंग पर विस्तार से रोशनी डाली। कहा कि राम नाम से ही विश्व का कल्याण हुआ है। प्रलय होने पर अंत में भी राम नाम ही बचेगा।
बापू ने स्वच्छता अभियान को साकार करने पर बल दिया। कहा कि पवित्रता में कभी कोई कमी नहीं रही है। काशी में ‘हर हर महादेव’ का नाद वातावरण की शुद्धि करता है। उन्होंने गंगा निर्मलीकरण को कारगर बनाने पर जोर दिया। महादेव ने जिस गंगा को सिर पर धारण कर रखा है, उसमें हम कचरा न डालें।
उन्होंने काशी की महिमा का बखान किया। कहा कि काशी आनंद का वन है। यहां भगवान विष्णु ने तपस्या की थी और मणिकर्णिका घाट के निकट स्थित कुंड में भगवान शिव ने स्नान किया था। मणिकर्णिका घाट काशी का मुखचंद्र है और इसमें कोई कलंक नहीं है।
मुख्य आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, ट्रस्टी प्रकाश पुरोहित, दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और अभिनेता मनोज तिवारी, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा आदि के अलावा मणिकर्णिका घाट के डोम राज परिवार के सदस्यों ने व्यासपीठ पर पुष्प अर्पित किया। नौ दिवसीय रामकथा मानस मसान का विराम 29 अक्तूबर रविवार को होगा।
बहुएं सीता बनें और सास में दिखे कौशल्या का चेहरा
रामकथा सुनते लोग
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मोरारी बापू ने सास-बहू के झगड़ों को दूर कर परिवार में प्रेम और शांति का वातावरण तैयार करने का संदेश मानस के जरिए दिया। कहा कि हर सास अपनी बहू में जानकी देखने लगेगी तो बहू अपनी सास में कौशल्या देखेगी।
सास और बहू के बीच प्रेम भरा इस तरह का रिश्ता होगा तो हमारे देश का भला हो जाएगा। कहा कि घर में जब बेटी आए तो उत्सव मनाना चाहिए। इसलिए कि कन्या के रूप में सात विभूतियां आती हैं। कन्या जन्म से राष्ट्र में संपत्ति, विभूति और ऐश्वर्य बढ़ता है।
कन्या शक्ति, विद्या, श्रद्धा, क्षमा का रूप है, उसका स्वागत करना चाहिए। मोरारी बापू ने कहा कि जहां पांच वस्तुएं होती है, वहीं तीर्थ है। जहां जल, तप, वन, अग्नि और मंत्र निरंतर प्रकट हों, वहां तीर्थ है। प्रत्येक मसान तीर्थ है और मणिकर्णिका घाट महान तीर्थ है। मसान शिव के लिए क्रीड़ा स्थली है।
जीव के लिए जागरण की स्थली है और शव के लिए विश्राम स्थली। बापू ने कहा कि विवेक की प्राप्ति और वृद्धि साधु संगति से ही होती है। बुद्ध पुरुष और परमात्मा का किसी से देह संबंध नहीं बल्कि स्नेह संबंध होता है।