फूलों-रंगों की अल्पनाओं से तैयार मिट्टी की वेदियों पर हल्दी-चंदन से सजाए गए करवा की बुधवार की शाम अखंड सुहाग के लिए सविधि पूजा की। रोली, चंदन, आरती की थाल लेकर मंदिरों, घर की छतों पर करवा की पूजा के बाद चंद्र दर्शन किया। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद चलनी से पहले चांद को फिर चांद सरीखे पिया के मुखड़े का दीदार किया। पतिदेव ने पानी पिलाया। उन यादगार पलों को साझा करने के लिए व्रती महिलाओं के साथ उनकी सहेलियां और रिश्तेदार भी जुटे। खास तौर से पंजाबी, राजस्थानी और मारवाड़ी समाज की महिलाओं में पति की दीर्घायु और सौभाग्य कामना से रखे गए करवा चौथ व्रत पर उत्सव सरीखा माहौल नजर आया।
सांझ ढलने के बाद काशी में चांद के साथ पिया के दीदार का करवा चौथ व्रत सुहागिन महिलाओं में खुशी और उल्लास का संचार कर गया। सुहागिन महिलाओं ने सोलह शृंगार किए। मेहंदी से हथेलियां रचाई गईं। शाम ढलते ही करवा पूजन के बाद छतों पर व्रती महिलाएं परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पहुंच गईं। रात 8:27 बजे चंद्रोदय होते ही चलनी की ओट में पिया के मुखड़े का दीदार कर महिलाओं ने चंद्रमा को अर्घ्य दिया व आरती उतारी। कई जगह चंद्रदर्शन के दौरान आतिशबाजी भी हुई।