श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष व प्रख्यात ज्योतिषविद प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि इसी मास को कार्तिकेय का मास भी कहा जाता है। चातुर्मास का समापन भी भगवान श्रीहरि विष्णु का जागृत हो जाते हैं और सभी धार्मिक कार्यों की स्वीकृति देते हैं।
शास्त्रों में इस मास को ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाला कहा गया है। कार्तिक में तुलसी व पीपल वृक्ष की पूजा, यमदेव को प्रसन्न करने के लिए आकाशदीप जलाने, एक माह तक आंवले के वृक्ष को सींचना और इसकी पूजा करना फलदायी माना गया है। व्रत रखकर गंगा स्नान कर दान करने से तीर्थयात्रा के समान फल की प्राप्ति होती है। इस मास में मठा, साग और दाल का सेवन निषेध है।
मिट्टी का जलाएं दीप, जीवन में आएगी रोशनी : कार्तिक मास भर रोज मिट्टी का दीपक जलाएं। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि एक दीपक प्रतिदिन मंदिर में शिवलिंग व नारायण के समक्ष या घर में जलाएं। तुलसी, पीपल व वटवृक्ष के पौधे के समक्ष दीप जलाएं। संभव हो तो प्रतिदिन आकाशदीप जलाएं।
ये हैं कार्तिक मास में पड़ने वाले व्रत और त्योहार
करवा चौथ - 29 अक्तूबर, अहोई अष्टमी - एक नवंबर, दो नवंबर को राधा अष्टमी व्रत, पांच को रम्भा एकादशी व गोबतसर द्वादशी व्रत, छह को धनतेरस और धन्वंतरि जयंती, सात को नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) व हनुमान जयंती, आठ को दीपावली, नौ को अमावस्या व गोवर्धन पूजा (अन्नकूट), 10 को भैया दूज (यम द्वितीया), 12 को छठ पूजा (नहाय-खाय से उदयमान अर्घ्य तक), 13 से 16 नवंबर तक (15 नवंबर को संध्या अर्घ्य) छठ पूजा, 17 को गोपाष्टमी, 18 को अक्षय नवमी, 20 को देवउठनी एकादशी/तुलसी विवाह, 22 को प्रदोष त्रयोदशी व्रत, 23 को बैकुंठ चतुर्दशी, 24 को कार्तिक पूर्णिमा/देव दीपावली होगी।