वाराणसी। शहर के कई इलाकों में बंदरों के उत्पात से दहशत है। बंदरों को पकड़ने में अब तक नगर निगम नाकाम है। बंदरों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। बंदरों के नोंचने, काटने से जनता त्रस्त है। शहर को बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए नगर निगम ने मथुरा से बंदरों को पकड़ने वाले विशेषज्ञ को बुलाया है। लेकिन अब तक वह विशेषज्ञ नहीं आया है।
पिछले दिनों अस्सी क्षेत्र में उत्पाती बंदरों ने 20 से अधिक बच्चों को काटकर जख्मी कर दिया था। आलम यह है कि बंदरों की दहशत की वजह से लोग घर से बाहर नहीं निकलने में डर रहे हैं। दुकान, मकान, मंदिर, पार्क के साथ करीब-करीब हर जगह बंदरों ने डेरा डाल रखा है। मौके का फायदे उठाते हुए बंदर घरों में घुस जाते हैं। जिसके बाद सामान आदि नष्ट कर दे रहे हैं। साथ ही लोगों पर झपट्टा मार देते हैं।
इन क्षेत्रों में है बंदरों का आतंक
गोदौलिया, रोहित नगर, रानीपुर, शिवराज नगर, गांधीनगर, सिगरा, महमूरगंज, कैंट, औरंगाबाद, लक्ष्मी कुंड, लोहटिया, बड़ा गणेश, हरतीरथ, मैदागिन, चेतगंज, नदेसर, दुर्गाकुंड, लंका, साकेत नगर, सुंदरपुर, समेत शहर के विभिन्न इलाकों में बंदरों का आतंक ज्यादा है।
बंदरों को पकड़ने वाले को मथुरा से बुलाया गया है। जल्द ही बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू करेंगे।
डॉ. अजय प्रताप सिंह, नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी
बातचीत
बंदरों के झुंड कालोनी में आ जाए तो बहुत दिक्कत होती है। जब तक बंदरों के झुंड कालोनी से बाहर न चले जाए । तब तक रुककर रहना पड़ता है।-संगीता यादव, रोहित नगर
बंदरों के चलते छत पर जाना मुहाल हो गया है। छत पर कपड़ा फैलाने के दौरान भी बंदर झपट्टा मारने और गुर्राते हैं। डर के मारे छत का दरवाजा हमेशा बंद रखा जाता है। -सुनीता वर्मा गांधीनगर
दरवाजा अगर खुला छूट गया तो बंदर घर में आ जाते हैं। घर का सामान नुकसान करके चले जाते हैं। खाने पीने का समान ले जाएं को कोई दिक्कत नहीं। कपड़े फाड़ देते हैं। -रिंकी पाल शिवराज नगर
नगर निगम से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हमेशा डर बना रहता है। छत पर पानी की टंकी रखी है। बंदरों का झुंड आ गया तो टोटी खोलकर पानी गिरा देते हैं। -आरती देवी रानीपुर
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