गंगा-वरुणा की बाढ़ से घिरे निचले स्तरों में जिंदगी की गाड़ी धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी है। हालांकि घरों-गलियों से पानी निकलने के बाद कीचड़ और सीलन के चलते मुसीबतें बनी हुई हैं। वरुणा किनारे के सैकड़ों घरों में अब भी पानी भरा हुआ है। महज एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से घटाव की वजह से पिछले 48 घंटे के दौरान अब तक महज 43 सेंटीमीटर पानी नीचे खिसका है। इस वजह से परेशानियां कम नहीं हुई हैं। रविवार को गंगा का जलस्तर 69.67 मीटर रिकार्ड किया गया।
अस्सी घाट पर अभी जन जीवन सामान्य नहीं हो सका है। हालांकि रामानुज नगर और अस्सी के 30 से अधिक घरों की सतह से बाढ़ का पानी निकल गया है लेकिन अभी भी कुछ घरों में कदम रखने की स्थिति नहीं बन सकी है। गोयनका संस्कृत महाविद्यालय परिसर के बाढ़ राहत शिविर में शरण लेने वाले परिवारों में से अधिकाधिक लोगों ने रविवार को घर वापसी कर ली लेकिन अभी भी तीन परिवार शिविर में ही पड़े हुए हैं। जिन मुहल्लों , गलियों से पानी निकल गया है, वहां अब कीचड़ और सीलन से मुश्किलें पैदा होने लगी हैं। प्रभावित इलाकों में नगर निगम की ओर से सफाई तो कराई जा रही है लेकिन काम की गति सुस्त होने से बहुत सुधार नहीं है। इन इलाकों में अभी तक न तो चूने का छिड़काव किया जा सका है और न क्लोरीन की गोलियां वितरित की जा रही हैं। सुबह-ए-बनारस के मंच से भी अभी गंगा की लहरें नीचे नहीं उतरी हैं। पंडों की छतरियां अभी भी ऊपरी सतह की सीढ़ियों पर लग रही हैं। मणिकर्णिका श्मशान घाट पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए छतों पर पर्याप्त जगह नहीं होने की वजह से लोगों को चिताएं लगवाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। गंगा आरती भी दशाश्वमेध घाट और शीतला घाट पर छतों पर ही कराई जा रही है।
गंगा और वरुणा का जलस्तर घटने के बाद अब तटीय इलाकों में चारों तरफ गंदगी-कीचड़ और जगह-जगह जलभराव के बीच बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ये हालात लंबे समय तक बने रहे तो डायरिया, टाइफाइड, मलेरिया, डेंगू के संक्रमण की आशंका से कतई इनकार नहीं किया जा सकता।
चिकित्सक भी बाढ़ उतरने के बाद की स्थिति को बेहद संवेदनशील मान रहे हैं। एहतियात के तौर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीबी सिंह ने दो चिकित्सा टीमों का गठन किया है। सीएमओ ने बताया कि चिकित्सा टीमें प्रभावित क्षेत्रों में कैंप लगाकर स्वास्थ्य परीक्षण करेंगी। दवाएं बांटेंगी। एक टीम नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जंग बहादुर और दूसरी वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. एके पांडेय के नेतृत्व में काम करेगी। दीनदयाल अस्पताल के फीजिशियन डॉ. पीके सिंह ने सलाह दी है कि स्वच्छ पेयजल का सेवन करें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग जरूर करें। साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। यदि बुखार हो तो बिना चिकित्सक की सलाह के कोई भी दवा न लें।