Varanasi News: बनारस के मोहम्मद शाहिद अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन उनके खेल अंदाज को आज भी याद किया जाता है। उनकी पत्नी ने अमर उजाला के साथ साक्षात्कार में कई बादें साझा की।
मास्को ओलंपिक 1980 में भारत ने हॉकी मे स्वर्ण पदक जीता था। उस टीम में वाराणसी के मोहम्मद शाहिद भी शामिल थे। मोहम्मद शाहिद की पत्नी परवीन शाहिद ने अपने घर पर वह स्वर्ण पदक दिखाया।
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आज भी उस पदक की चमक फीकी नहीं पड़ी है। परवीन शाहिद ने बताया कि वह प्रतिदिन उसको साफ करती है। उनके शौहर ने हॉकी में इतने पदक जीते हैं कि उनको साफ करने में तीन घंटे से अधिक समय लगता है।
उन्होंने बताया कि उनके पति ने बांस की छोटी सी हॉकी खेलना शुरू किया था। क्योंकि उस समय छोटे साइज का हॉकी नहीं मिलती थी। पुलिस लाइन से उनका हॉकी का सफर शुरू हुआ जो तीन ओलंपिक तक चला।
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पद्मश्री और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित मोहम्मद शाहिद की असमय निधन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी याद को संजोने का काम किया।उनकी स्मृति में हर साल ऑल इंडिया मोहम्मद शाहिद प्राइज़ मनी हॉकी प्रतियोगिता वाराणसी में आयोजित करती है। साथ ही लखनऊ में गोमती नगर में मोहम्मद शाहिद के नाम से हॉकी का आधुनिक स्टेडियम का निर्माण भी कराया है।