23 मार्च की शाम जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो लगा जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई। असहद ने बताया कि एकबारगी तो लगा कि अब जीवन खत्म हो गया। मौत सामने खड़ी नजर आ रही थी। परिवार के लोगों के चेहरे बार-बार सामने आ रहे थे। अपनी किस्मत को कोसने लगा था कि कहां से यह बीमारी उसे हो गई, पर अस्पताल के डॉक्टरों ने हौसला बढ़ाया। जिंदगी की नई उम्मीद जगाई।
नेट पर जब इस बीमारी की चपेट में आए चीन के लोगों और उनके सुरक्षित बचने के बारे में जानकारी ढूंढनी शुरू की तो भरोसा बढ़ता गया। खुद को मानसिक रूप से मजबूत किया। डर और तनाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया। डॉक्टरों की परामर्श के अनुसार समय पर दवा और सावधानियां बरतता गया। एक के बाद एक चार रिपोर्ट पॉजीटिव आई तो फिर थोड़ा डर लगा, लेकिन खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया।
डर और तनाव को खुद पर हावी न होने देने के कारण ही बीमारी को मात देने में कामयाबी मिली। असहद के मुताबिक कोरोना हौव्वा नहीं है। दरअसल, लोगों को इसके बारे में सही जानकारी ही नहीं है। यह दूसरी बीमारियों जैसी ही है, बस इसमें थोड़ी अतिरिक्त सावधानी की जरूरत है। इसके लक्षण तत्काल नहीं दिखते। ऐसे में अगर हम दूर-दूर रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहें, साफ-सफाई रखें और नियमित अंतराल पर हाथ धुलते रहें तो इससे आसानी से निपटा जा सकता है। लोग सतर्क रहें, जागरूक बनें। डर और तनाव को खुद पर हावी न होने दें।