जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी रुड़की और खड़गपुर के विशेषज्ञ पीपा पुल के आधुनिक डिजाइन पर शोध कर रहे हैं। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय निदेशक राकेश कुमार ने बताया कि इस डिजाइन से जल परिवहन की बाधा समाप्त होगी। प्रस्तावित मॉडल में स्वचालित इंजन लगे होंगे। जलयान के आने पर पीपा पुल के बीच जुड़ा आधुनिक ट्रैक का एक सिरा खुल कर दूसरी ओर चला जाएगा। फिर अपनी जगह पर वापस लग जाएगा। इससे घंटों का काम कुछ मिनटों का रह जाएगा। गाजीपुर से वाराणसी के बीच गंगा नदी पर तीन स्थानों पर पीपा पुल बने हैं। जल परिवहन के जहाज आने पर पीपा पुलों को खोलने में तीन से चार घंटे बर्बाद होते हैं। संवाद
नहीं रुकेगा पीपा पुल का ट्रैफिक
गंगा में जलयान के आने पर पीपा पुल के आठ ब्लॉक को खोलना पड़ता है। तीन से चार घंटे तक यातायात प्रभावित होता है या मार्ग ही परिवर्तित करना पड़ता था। इसकी वजह से राहगीरों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। पीपा पुल में मॉड्यूलर ट्रैक जुड़ जाने से जलयान की आवाजाही सुगम होगी। साथ ही पीपा पुल से जाने वाले लोगों को भी सहूलियत होगी।
बाढ़ के समय जेटी की तरह होगा प्रयोग
बाढ़ के दिनों में मॉड्यूलर पीपा जेटी की तरह प्रयोग में लाया जाएगा। बाढ़ आने पर पीपा पुल हटा लिए जाते हैं। उस समय मॉड्यूलर पीपा घाट किनारे लगाए जाएंगे। इसकी मदद से नाव से गंगा पार करने वाले लोगों के लिए यह जेटी की तरह काम करेगा।